बरेली। अमीरुल मोमेनीन हजरत अली इब्ने अबि तालिब के 14 सौ साला यौमे शहादत पर शिया हलकों में गम का माहौल छा गया है। तमाम लोगों ने स्याह लिबास पहन लिए हैं और अपने इमाम के गम में डूब गए हैं। एक तरफ जहां मस्जिदों में खुसूसी नमाज व दुआओं की तिलावत की गई, वहीं दूसरी तरफ इमामबाड़ों में और घरों में मजलिसो मातम का दौर चला।
पुराना शहर मीरा की पैठ स्थित इमामबाड़ा मुजफ्फर हुसैन साहब में आयोजित मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना वसीम हुसैन नकवी ने मौला अली की विशेषताओं और जीवन के मूल्यों प्रकाश डाला। मौला अली की शहादत का वर्णन भी किया। इससे पहले जीशान हैदर और शहाब नकवी ने सोजखानी से मजलिस का आगाज किया। कलीम हैदर नकवी, अनवर अली शाह, समर नकवी, काशिफ नकवी, हैदर नकवी, वजाहत हुसैन, शाह आलम नकवी आदि मौजूद रहे। यूनाइटेड शिया मूवमेंट के प्रवक्ता समर अब्बास जैदी ने बताया कि मजलिसो मातम को दौर शहर अन्य इमामबाड़ों में देर रात तक जारी। यह सिलसिला 27 मई तक जारी रहेगा।