बरेली। मेहनत और लगन से लक्ष्य को ध्यान में रख कर यदि प्रयास किया जाए तो सफलता जरूर मिलती है। इसे सच साबित कर दिखाया है शहर निवासी मिमांसा पांडेय ने। मुक्केबाजी के शौक में मिमांसा शहर के स्पोर्ट्स स्टेडियम गई तो वहां भी अभ्यास के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं मिले, लेकिन वो हिम्मत नहीं हारी। बिना रिंग, खुले आसमान के नीचे एक पेड़ की टहनी में पंचिंग बैग लटका कर अभ्यास करने वाली मिमांसा की यह मेहनत रंग लाई है। जूनियर बालिका 75 किग्रा वेट की बॉक्सिंग प्रतियोगिता के लिए उसका चयन इंडिया कैंप में हुआ है। इस आशय का पत्र मिलने के बाद शुक्रवार उसका स्टेडियम में उसके साथ अभ्यास करने वालों के अलावा उसके कोच शैवर अली खान व क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी विजय कुमार ने उसका सम्मान किया।
शहर के मोहल्ला कोहाड़ापीर निवासी एमआर अनूप पांडेय की पुत्री मिमांसा अपने मुक्कों का पूरी दुनिया में लोहा मनवाने वाली भारतीय बॉक्सर मैरी काम पर बनी फिल्म देखने के बाद बॉक्सर बनने की ठानी। इसके लिए उसने स्टेडियम का रुख किया, लेकिन वहां न तो रिंग था न ही जरूरी संसाधन। खुले आसमान के नीचे स्टेडियम में एक पेड़ की टहनी में बंधे पंचिंग बैग पर उसने अभ्यास शुरू किया। बेटी की दिलचस्पी देख पिता ने उसे पंचिंग बैग लाकर दिया ताकि वह घर में भी अभ्यास कर सके। कोच शैवर अली खां के निर्देशन में मिमांसा लगातार मुक्केबाजी में आगे बढ़ती गई। मात्र एक साल के कड़े अभ्यास की बदौलत मिमांसा ने पहले सब जूनियर स्टेट और फिर जूनियर नेशन में प्रतिभाग किया। अपने मुक्कों का दमखम दिखा चुकीं मिमांसा का चयन अब 75 किग्रा वजन की जूनियर महिला मुक्केबाज के रूप में इंडिया कैंप के लिए हुआ है। नेशनल बॉक्सिंग अकादमी की ओर से आयोजित यह कैंप 27 मई से 17 जून तक रोहतक में चलेगा। मिमांसा ने कहा कि यहां तक का सफर उसने बिना बॉक्सिंग रिंग के पूरा किया है। अब क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी ने बॉक्सिंग रिंग और कार्नर पैड की मांग खेल निदेशालय से की है। मिमांसा के कोच शैवर अली खान ने बताया कि इंडिया कैंप में यदि मिमांसा का फाइनल चयन हो जाता है तो वह देश की ओर से हंगरी खेलने जाएगी।