बरेली। पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू पहले से ज्यादा लोगों पर सिर चढ़कर बोला। प्रचंड मोदी लहर ने संतोष गंगवार को आठवीं बार सवा लाख से ज्यादा वोटों से भारी जीत दिला दी। इस बात को स्वयं आठवीं बार सांसद बनने के बाद संतोष गंगवार ने भी स्वीकार किया और अपनी जीत का श्रेय भी पीएम मोदी को दिया। जनता ने भी इस बार उनके चुनाव प्रचार में कई जगह उनसे या उनके समर्थकों से खुलकर कह दिया था कि वह वोट मोदी को दे रहे हैं न कि संतोष को। यही कारण रहा कि सपा-बसपा गठबंधन के बाद भी भाजपा के संतोष गंगवार और आंवला प्रत्याशी धर्मेंद्र कश्यप के सिर जीत का सेहरा तो बंधा, लेकिन केवल मोदी की बदौलत।
बरेली और आंवला में दोनों प्रत्याशियों को 2014 के मुकाबले ज्यादा वोट मिले, लेकिन इस बार जीत का अंतर घट गया। गठबंधन का वोट एक दूसरे को ट्रांसफर न होने से चुनाव से पहले कांटे की टक्कर देते दिखे भगवत भी करारी पछाड़ खा गए। पांच साल पहले संतोष गंगवार ने मोदी लहर पर सवार होकर 5 लाख 18 हजार 258 वोट हासिल किए थे, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी सपा की आयशा इस्लाम को 2 लाख 77 हजार 573 वोट ही मिल पाए थे। संतोष गंगवार की 2014 में 2 लाख 40 लाख 685 वोटों से उनकी जीत हुई थी। इस बार संतोष गंगवार को 5 लाख 63 हजार 533 वोट मिले, जो पहले से कहीं ज्यादा हैं, लेकिन उनकी जीत महज 1 लाख 66 हजार 130 वोटों से ही हुई। 2014 के चुनाव में सपा का बसपा के साथ गठबंधन नहीं था। वहीं बसपा प्रत्याशी उमेश गौतम भी चुनाव मैदान में थे, जिनको 1 लाख 6 हजार 49 वोट मिले थे, लेकिन 2019 के चुनाव में सपा का बसपा से गठबंधन था। दोनों दलों के संयुक्त उम्मीदवार भगवत सरन गंगवार थे। भगवत को 2019 में 3 लाख 97 हजार 403 वोट मिले। उनका गठबंधन का वोट बैंक (मुस्लिम, यादव, जाटव समेत अन्य पिछड़े दलित) भी दरक गया। इससे सपा-बसपा गठबंधन का गणित गड़बड़ा गया और भगवत चुनाव परिणाम में बुरी तरह पछाड़ खा गए। मगर भगवत के टक्कर देने से भाजपा प्रत्याशी की जीत का अंतर काफी कम हो गया।
धर्मेंद्र भी मोदी के सहारे दूसरी बार पहुंचे संसद
आंवला से भाजपा प्रत्याशी धर्मेंद्र कश्यप 2014 में भी मोदी लहर में जीते थे। वह मोदी मैजिक के दम पर इस बार भी सपा-बसपा गठबंधन की मजबूत प्रत्याशी रुचिवीरा को हराकर दोबारा संसद पहुंच चुके हैं। मगर, उनसे भी आंवला के मतदाता नाराज थे। मतदान से पहले उनका टीवी चैनलों पर जमींदारों के बारे में दिया गया बयान विवाद की जड़ बना। सांसद रहने के दौरान क्षेत्र में कोई काम न कराने से जनता भी आक्रोशित थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंवला के सैनिक मैदान आलमपुर जाफराबाद में जब धर्मेंद्र कश्यप के पक्ष में चुनावी सभा की थी तो उसमें उनका नाम तक नहीं लिया था। अपने भाषण में मोदी ने यह कहा था कि आप कमल निशान का बटन दबाओगे तो वोट सीधे मोदी के खाते में जाएगा। शायद पीएम यह जानते थे कि प्रत्याशी को लेकर क्षेत्र की जनता संतुष्ट नहीं है। इसलिए मोदी ने अपने भाषण में वोट भी अपने ही नाम पर मांगा। धर्मेंद्र कश्यप को पहले से 1 लाख 24 हजार 571 वोट अधिक मिले, लेकिन उनकी जीत का अंतर भी घटा। पिछली बार धर्मेंद्र कश्यप जहां 1.38 लाख से अधिक वोटों से जीते थे, वहीं इस बार उनकी जीत 1 लाख 12 हजार 828 वोटों से हुई। पिछली बार रनर रहे सपा प्रत्याशी सर्वराज सिंह इस बार कांग्रेस के प्रत्याशी थे, जो मात्र 62 हजार 311 वोटों पर सिमट गए। गठबंधन ने बिजनौर की रुचिवीरा को मैदान में उतारा था।
2014 में भाजपा, सपा-बसपा और कांग्रेस प्रत्याशियों को मिले वोट (विधानसभा वार)
(बरेली लोकसभा)
राजनीतिक दल मिले वोट
भाजपा- 518258
सपा- 277573
बसपा- 106049
कांग्रेस- 84213
बरेली सीट पर किस प्रत्याशी को कितने वोट मिले
प्रत्याशी मिले वोट दल
संतोष गंगवार 563533 भाजपा
भगवत सरन 397403 सपा-बसपा गठबंधन
प्रवीण सिंह ऐरन 74003 कांग्रेस
समन ताहिर- 2482 प्रगतिशील सपा
सतीश कुमार- 7515 कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया,
जगपाल सिंह यादव- 2653 अखंड समाज पार्टी,
मनोज विकट- 681 बहुजन न्याय दल,
यतेंद्र सिंह- 498 बहुजन सम्यक पार्टी मिशन,
रहीस मियां- 644 वंचित समाज इंसाफ पार्टी,
राबिया अख्तर- 687 खुसरो सेना,
लईक अहमद मंसूरी- 851 नैतिक पार्टी,
ऊषा अग्रवाल- 1071 निर्दलीय,
जावेद खां- 2789 निर्दलीय,
नितिन मोहन - 1192 निर्दलीय,
राकेश अग्रवाल- 1985 निर्दलीय,
सैयद राशिद अली- 3984 निर्दलीय।
नोटा - 3797
नोट : आंकडे़ इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट से उठाए गए हैं।
आंवला सीट
किस दल के प्रत्याशी को कितने वोट मिले
प्रत्याशियों के नाम मिलने वाले वोट राजनीतिक दल
धर्मेँद्र कश्यप- 534742 भाजपा
रुचिवीरा- 421914 बसपा
सर्वराज सिंह- 62311 कांग्रेस,
मोहम्मद अतीक - 1300 नेशनल फिफ्टी-फिफ्टी,
इरशाद अली- 909 अंसारी वंचित समाज इंसाफ पार्टी
ऋषिपाल- 1555 जनशक्ति एकता पार्टी,
दिनेश कुमार- 1055 हिंदुस्तान निर्माण दल
धर्मेंद्र कुमार- 1374 शिवसेना
प्रमोद कुमार यादव - 940 भारतीय कृषक दल,
प्रीति कश्यप - 1734 राष्ट्रीय मजदूर एकता पार्टी
रामफल शाक्य - 1655 बहुजन मुक्ति पार्टी
सुनील कुमार- 2106 प्रगतिशील समाजवादी पार्टी,
लक्ष्मी- 3092 निर्दलीय
हेमेंद्र पाल सिंह- 3668 निर्दलीय।
नोटो- 9162