बरेली। लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हुआ। ढाई महीने की चुनावी प्रक्रिया के बाद आज फैसले की घड़ी है। बरेली और आंवला के चुनाव परिणाम बताएंगे कि दोनों लोकसभा क्षेत्रों में मोदी फैक्टर चला या फिर सपा-बसपा का जातीय समीकरण। इस बार का चुनाव राष्ट्रवाद बनाम मोदी विरोध पर आधारित था। मतदाताओं ने या तो मोदी को जिताने के लिए वोट दिया या फिर हराने के लिए।
मतदान के दौरान और एग्जिट पोल में भी यह अनुमान गया कि भाजपा को इस बार के लोकसभा चुनाव में अपने आधार वोट सवर्ण जैसे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ के अलावा पिछड़ी और दलित जातियों का वोट मिला। भाजपा के दोनों प्रत्याशियों संतोष गंगवार और धर्मेंद्र कश्यप ने कुछ मुस्लिम समुदाय के वोट मिलने का भी दावा किया है। वहीं सपा-बसपा गठबंधन को मुस्लिमों के अलावा यादव और दलितों में जाटवों के वोट थोक में गए माने जा रहे हैं। इसके अलावा गठबंधन प्रत्याशी कुर्मी बिरादरी थे। इस बिरादरी पर भाजपा प्रत्याशी संतोष गंगवार का पहले से ही दबदबा है। इसलिए कुर्मी बिरादरी किसी अनुपात में भाजपा के पक्ष में गई है और किस अनुपात में गठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में। मतगणना में यह भी स्पष्ट हो जाएगा।
2014 में प्रचंड मोदी लहर में जीते थे संतोष-धर्मेंद्र
2014 की मोदी लहर में जिस तरह से जातीय समीकरण टूट गए थे। और दोनों सीटों पर ही नहीं बल्कि बरेली मंडल की पांच में से चार लोकसभा सीटों पर भाजपा ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। मोदी लहर के चलते बरेली से भाजपा प्रत्याशी संतोष गंगवार को 5.18 लाख से अधिक वोट मिले थे और वह 2.39 लाख से अधिक वोटों से जीतने में कामयाब रहे थे। संतोष गंगवार को प्रत्येक विधानसभा में प्रतिद्वंद्वी सपा प्रत्याशी आयशा इस्लाम से भारी बढ़त मिली थी। किसी भी राउंड में संतोष गंगवार पीछे नहीं हुए थे। वहीं आंवला में भी भाजपा प्रत्याशी धर्मेंद्र कश्यप मोदी लहर पर सवार होकर 1.38 लाख से अधिक वोटों से चुनाव जीत गए थे। उनके सामने सपा प्रत्याशी सर्वराज सिंह थे, जिनको करारी हार का सामना करना पड़ा था।
2014 में भाजपा, सपा-बसपा और कांग्रेस प्रत्याशियों को मिले वोट (विधानसभा वार)
(बरेली लोकसभा)
विधानसभा का नाम भाजपा सपा बसपा कांग्रेस
मीरगंज 104570 53161 30590 9384
भोजीपुरा 103327 75642 29505 11893
नवाबगंज 102449 59721 22620 14433
शहर 115900 50747 14764 22278
कैंट 92012 38302 8570 26225
कुल वोट 518258 277573 106049 84213
वर्ष 2009 में चारो प्रमुख राजनीतिक दलों को मिले वोट (विधानसभा वार)
विधानसभा का नाम भाजपा सपा बसपा कांग्रेस
मीरगंज 37339 19511 41123 45485
भोजीपुरा 45024 13747 59862 43262
नवाबगंज 44621 28456 41173 31861
शहर 45689 7316 21710 52006
कैंट 38432 4898 18102 48330
विपक्ष को उल्टी पड़ी थी मुस्लिम वोटों की राजनीति
वर्ष 2014 में भाजपा ने जहां हिंदुत्व की राजनीति करते हुए उसमें विकास और राष्ट्रवाद का तड़का लगाकर चुनाव प्रचार किया था। वहीं विपक्ष तबके भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की उस चाल को समझ नहीं पाया। सपा, बसपा और कांग्रेस ने मुस्लिम वोटों की राजनीति की। उसका परिणाम यह रहा कि हिंदू वोट भाजपा के पक्ष में एकजुट हुआ। मुस्लिम वोटर अकेला पड़ गया और उसका विभाजन तीन राजनीतिक दलों सपा, बसपा और कांग्रेस में होने से भाजपा को उसका लाभ मिला। भाजपा न केवल बरेली बल्कि आस-पास की सीटों पर भी बड़े अंतर से जीत हासिल करने में कामयाब रही थी।
इस बार बदले हुए हैं राजनीतिक समीकरण
इस बार राजनीतिक समीकरण बदले हुए हैं। तब मुस्लिम वोटों में बिखराव हो गया था। मुस्लिम वोट सपा, बसपा और कांग्रेस में विभाजित होने और हिंदुओं की विभिन्न जातियों का वोट भाजपा के पक्ष में लामबंद होने का फायदा इस पार्टी को मिला था, मगर इस बार राजनीतिक समीकरण बदले हुए हैं। सपा और बसपा का गठबंधन है। इसके चलते मुस्लिम वोट विभाजित न होकर गठबंधन के पक्ष में पूरी तरह लामबंद है। इसके अलावा हिंदुओं में यादव और जाटवों का वोट भी गठबंधन के पक्ष में है। भाजपा का वोट बैंक समझी जाने वाली कुर्मी बिरादरी में भी कुछ वोट गठबंधन को मिलने की उम्मीद है। इसके चलते सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी ने भाजपा को कांटे की टक्कर दी है। चुनाव परिणाम बताएंगे कि मोदी लहर भारी है या फिर सपा-बसपा गठबंधन का जातीय समीकरण।