बरेली। पुलिस और प्रशासन अपनी तरफ से शांतिपूर्ण ढंग से मतगणना पूरी कराने की भरसक कोशिशों में जुटा हुआ है लेकिन खुफिया विभाग की रिपोर्ट में लगातार हंगामा होने की आशंका जताई जा रही है। ईवीएम को निशाना बनाकर पूरे देश की राजनीति में हलचल मची ही हुई है, खुफिया विभाग ने प्रशासन को दी अपनी ताजा रिपोर्ट में कई और ऐसे कारण बताए हैं जिन पर प्रशासन को राजनीतिक दलों की ओर से गतिरोध पैदा किए जाने की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि राजनीतिक दलों की ओर से हंगामा कराने के बहाने ढूंढे जाएंगे। मतगणना स्थल के आसपास कड़ी चौकसी के साथ खुफिया तंत्र को सक्रिय करते हुए प्रशासन की ओर से इससे निपटने की तैयारी तो की ही गई है, मतगणना कार्मिकों को भी कड़ी हिदायत दी गई है वे मतगणना के दौरान ऐसी कोई चूक न करें जिससे प्रत्याशी और उनके समर्थकों को हंगामा खड़ा करने का मौका मिले।
खुफिया विभाग की ओर से प्रशासन को दी गई ताजा रिपोर्ट के मुताबिक आंवला सीट के एक उम्मीदवार की ओर से अपने 50 फीसदी से ज्यादा काउंटिंग एजेंट बाहर के बनाए जाने पर विवाद खड़ा होने का पहला संभावित कारण बताया गया है। दरअसल पहले तो इस उम्मीदवार की ओर से मतगणना अभिकर्ता बनाने के लिए प्रशासन को सौंपी गई लिस्ट में सभी बाहरी लोगों को शामिल किया गया था, लेकिन प्रशासन की ओर से इस पर आपत्ति जताई गई तो वह 50 फीसदी स्थानीय लोगों को भी सूची में शामिल करने को रजामंद हो गए। इसके बाद करीब पचास फीसदी स्थानीय लोग भी इस लिस्ट में शामिल करने की हामी भर दी गई, लेकिन खुफिया विभाग का कहना है कि मतगणना में बाहरी लोगों की भागेदारी अब भी विवाद की वजह बन सकती है।
खुफिया विभाग को इसके अलावा ईवीएम और वीवीपैट के मिलान पर राजनीतिक दलों के विरोध की वजह से मतगणना में गतिरोध पैदा होने की भी आशंका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव आयोग ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में पांच-पांच वीपीपैट का ईवीएम के नतीजों से मिलान करने का आदेश दिया है लेकिन कुछ राजनीतिक दलों में सारी वीवीपैट का ईवीएम से मिलान कराने का दबाव बनाने की तैयारियों की जानकारी मिली है। मतगणना के दौरान ऐसी मांग उठने पर गतिरोध पैदा हो सकता है। इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव में हारजीत का अंतर बहुत कम यानी पांच-दस हजार वोटों से ही होने की स्थिति में भी हंगामा हो सकता है और हारने वाली प्रत्याशी और उसके समर्थकों की ओर से दुबारा मतगणना करने का दबाव बनाया जा सकता है। बुधवार को पुलिस-प्रशासन की बैठक में खुफिया विभाग की इस रिपोर्ट पर लंबा मंथन चला और कोई भी गतिरोध पैदा होने पर कड़ाई से निपटने के निर्देश दिए गए।
सभी एआरओ और मतगणना कर्मियों से कह दिया गया है कि मतों की गिनती के दौरान अगर कोई अभिकर्ता कोई बात कहता है तो उसकी अनदेखी न हो। कोशिश हो कि उसका तुरंत निस्तारण हो जाए। सीसीटीवी कैमरे से चप्पे-चप्पे पर निगरानी के इंतजाम है। किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी। - वीरेंद्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी