बरेली। कैंट में पूर्व में वोटर रहे निवासियों को बनाई जा रही नई मतदाता सूची से बाहर किया जा रहा है। इस मामले में कैंट बोर्ड सदस्य और अधिकारी आमने-सामने आ गए हैं। सदस्यों ने अधिकारियों पर नियमों को अनदेखा कर मतदाताओं को अवैध निवासी घोषित करने का आरोप लगाया है। साथ ही पूर्व में मतदाता रहे निवासियों को नई मतदाता सूची में शामिल न करने पर उग्र प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
सनद रहे कि कैंट बोर्ड के चुनाव फरवरी, 2020 में प्रस्तावित हैं। पूर्व में बनाई गई मतदाता सूची में अवैध तरीके से वोटर को जुड़वाने के आरोप लगने पर अब नई मतदाता सूची तैयार की जा रही है। इसके लिए फोटो आईडी प्रूफ अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं झुग्गी, झोंपड़ी और कैंट की सीमा के पास रहने वालों समेत कैंट बंगलों के आउट हाउसेज, किराए पर रहने वालों को अवैध निवासी मानते हुए उन्हें वोटर लिस्ट से बाहर किया जा रहा है। इस मामले में सदस्यों ने आपत्ति जताते हुए अधिकारियों पर पूर्व में गलत सूची बनाए जाने पर उन्हें घेरने की तैयारी कर ली है।
कैंट बोर्ड के सदस्य अब्दुल हामिद ने अधिकारियों के इस रवैए को जन विरोधी बताया है और लोकतंत्र से मतदान का अधिकार छीनने की साजिश बताई है। बताया कि कैंट बोर्ड के इस रवैये से निवासी आक्रोशित हैं। जल्द ही वे कैंट बोर्ड कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों का घेराव कर सकते हैं।
अधिकारियों ने बनाया है नया नियम
कैंट बोर्ड के सदस्य मदन सिंह बिष्ट के मुताबिक कैंट बोर्ड की ओर से दिए जा रहे अनुरोध पत्र में अवैध निवासी के बाबत कोई जिक्र नहीं है। अनुदेश में 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके, पिछले छह माह से कैंट मेें रहने वालों का जिक्र है। इसके तहत कैंट में पिछले छह माह से रहने वाले 18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके सभी निवासियों को वोटर बनाए जाने का नियम है। फिर भी अधिकारियों ने खुद से नए नियम बना लिए हैं।
पुरानी मतदाता सूची में गलत तरीके से लोगों के नाम शामिल किए जाने के आरोप लगे थे। इस बार फोटो आईडी प्रूफ के साथ कैंट एक्ट के तहत निवासियों के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे, जो नियमों के तहत वैध नहीं होंगे उन्हें बाहर किया जाएगा।
- पारसनाथ, कार्यालय अधीक्षक, कैंट बोर्ड