बरेली कॉलेज के बाद गन्ना उत्पादक महाविद्यालय बहेड़ी में भी घपलेबाजी पर जांच बैठ गई है। बरेली कॉलेज की तरह अनुदानित कॉलेज गन्ना उत्पादक में भी तमाम गड़बड़ियों की शिकायत डीएम के पास पहुंची है। यहां वित्तीय गड़बड़ियों से लेकर शिक्षकों के प्रमोशन, अनुमोदन में खेल हुआ। प्रबंध समिति के कुछ सदस्यों और छात्रों की शिकायत पर डीएम ने जांच शुरू कराई है। डीएम के निर्देश पर क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी (आरएचईओ), एसडीएम बुधवार को जांच करने पहुंचे। इस दौरान एबीवीपी के छात्रनेताओं ने जमकर हंगामा किया। प्राचार्य और भ्रष्टाचारी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस दौरान क्षेत्रीय विधायक छत्रपाल गंगवार भी पहुंचे। जांच समिति ने प्राचार्य से तीन दिन में सारे रिकॉर्ड तलब किए हैं।
कॉलेज की प्रबंध समिति के सदस्य दिनेश सूर्या, गजेंद्र सिंह ने विधायक छत्रपाल सिंह के साथ मिलकर करीब एक माह पहले डीएम को शिकायत दर्ज कराई थी। कहा था कि प्राचार्य, प्रबंधक और कोषाध्यक्ष ने वित्तीय गड़बड़ियां की हैं। दो सीनियर प्रवक्ता सुरेश पिपलानी व सचींद्र मोहन शर्मा को किनारे करकेजूनियर प्रवक्ता डॉ. अखिलेश पांडेय को प्राचार्य का चार्ज दे दिया। इसके अलावा बीएससी एग्रीकल्चर में अनुमोदित शिक्षकों की जगह फर्जी शिक्षक हैं। वहीं शिक्षकों के वेतन वृद्धि और अनुमोदन का खेल भी शामिल था। अधिकारियों का कहना है कि मैनेजमेंट ने कुछ शिक्षकों को रखा, उनका अनुमोदन विश्वविद्यालय से है या नहीं इसके रिकॉर्ड मांगे हैं।
आरएचईओ डॉ. राजेश प्रकाश जांच समिति के साथ जांच करने पहुंचे। वहीं दूसरे खेमे के प्रबंधक केंद्र पाल सिंह, विजेंद्र सिंह भी पहुंच गए। विधायक छत्रपाल भी पहुंच गए। समिति ने प्रबंधन के बाकी लोगों को अंदर आने से रोका। दूसरी तरफ एबीवीपी के नेताओं ने पहुंचकर जमकर हंगामा किया। छात्र नेता हिमांशु गंगवार ने ज्ञापन देकर आरोप लगाए कि छात्रों वार्षिकोत्सव के नाम पर तीस रुपये वसूले जाते हैं। खेल फीस लेने के बावजूद खेल नहीं होते। समिति ने सभी बिंदुओं पर जांच की। अब तीन दिन में सभी रिकॉर्ड तलब किए हैं।
लिपिक जुगाड़ से बन गया कार्यालय अधीक्षक
बहेड़ी। पुस्तकालय लिपिक रामचंद्र ने 2007 के अभिलेखों में गड़बड़ी कर लिपिक लिखाकर उच्च शिक्षा निदेशक को भेज दिया था, जिसके आधार पर उसका प्रमोशन कार्यालय अधीक्षक पर हो गया। ऑडिट में सारा खेल पकड़ा गया। इसके बाद प्रबंधक केंद्र पाल सिंह ने फिर से उसे पूर्व पद पर भेज दिया। बाबू ने रामचंद्र ने खुद को क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अटैच करा लिया। प्रबंधक ने बाबू राम चंद्र को अपने मूल पद पर ज्वाइन करने के आदेश दिए तो उसने मना कर दिया।
कॉलेज के गेस्ट हाउस में शराब पी जाती है। जो लोग टूटी बाइक से घूमते थे वह लग्जरी कारों से घूम रहे हैं। कॉलेज में घपले करके अपनी जेबें भर रहे हैं। इसके दोषी प्राचार्य, प्रबंधक व कोषाध्यक्ष हैं। उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। -चौ. गजेंद्र सिंह, सदस्य प्रबंध समिति
कमेटी के कुछ सदस्य कॉलेज को बर्बाद करने में जुटे हैं। वह अपना कॉलेज चमकाने के लिए यह सब कर हैं। उनके द्वारा लगाए गए सारे आरोप गलत हैं। जांच में सारी बात सामने आ जाएगी।
- चौ. नरेंद्र सिंह, कोषाध्यक्ष गन्ना उत्पादक महाविद्यालय
कॉलेज की प्रबंध समिति के कुछ सदस्यों और छात्रों ने प्रबंधक, प्राचार्य व कोषाध्यक्ष के खिलाफ शिकायत की थी। सेल्फ फाइनेंस विभाग में शिक्षकों के अनुमोदन की शिकायत हुई थी। कॉलेज से तीन दिन में सारे रिकॉर्ड मांगे हैं। जांच कर रिपोर्ट डीएम को सौंपी जाएगी।
- डॉ. राजेश प्रकाश, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी