बरेली। शहर में अवैध निर्माण के लिए बीडीए से 600 दुकानदारों, नर्सिंग होम, क्लीनिक, बरातघरों और कामर्शियल भवनों को नोटिस जारी करने पर बरेली विचार मंच के बैनर तले व्यापारियों ने सवाल उठाए हैं। बीडीए उपाध्यक्ष को मंच की ओर से पत्र लिखकर अवैध निर्माण के दोषी अभियंता, कर्मचारी, और अफसरों पर भी कार्रवाई की मांग की गई है।
बरेली विचार मंच के संजय अग्रवाल की ओर से बीडीए उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल को लिखे पत्र में बताया गया कि पिछले कुछ दिनों से बीडीए ने शहरी क्षेत्र में बने अस्पताल, बरातघर, कामर्शियल भवन और दुकानों समेत अन्य अवैध निर्माण के विरुद्ध अभियान चला रखा है। 600 व्यापारियों को जुर्माना और ध्वस्तीकरण का नोटिस भेजा जा चुका है। अवैध निर्माण भवन स्वामियों की गलती है, लेकिन इसको शह देने वाले और अवैध निर्माण कराने में शामिल रहे बीडीए के जेई, एई, कर्मचारियों के अलावा उस समय के अफसरों पर भी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? जबकि शासनादेश में अवैध निर्माण की दिशा में दोनों पर कार्रवाही का प्रावधान है। विचार मंच का कहना है कि बिना बीडीए अभियंताओं की सांठगांठ के अवैध निर्माण संभव नहीं। भविष्य में इस तरह के अवैध निर्माण फिर से न हो सकें।
इसमें वर्ष 2017 के एक शासनादेश का हवाला भी दिया गया है। इसमें बताया गया कि अतिक्रमण या अवरोध को रोकने या जानबूझकर उपेक्षा करने की स्थिति मेें दोषी को एक माह का साधारण कारावास और 10 हजार के जुर्माने दंडित किया जाएगा। बरेली विचार मंच का कहना है कि शासन की इस नियमावली से केवल प्रतिष्ठान मालिकों के खिलाफ तो कार्रवाई हो रही है, लेकिन अवैध निर्माण पर कार्रवाई करने में जानबूझकर शिथिलता बरतने वाले बीडीए अफसर, इंजीनियर, सुपरवाइजर और अन्य कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। इसलिए इस पूरे मामले की विजिलेंस जांच कर सब दोषियों को एक साथ दंडित किया जाए।