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न्यूज चैनलों की डिबेट ने बोर होने से बचाया, ज्योति सिंह, मंडल और जिले की टॉपर

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बरेली। डीपीएस की छात्रा ज्योति सिंह कर्मचारीनगर में रहती हैं। उनके पिता जितेंद्र कुमार सिंह रेलवे में लोको पायलट हैं और मां मालती सिंह गृहणी हैं। 96.6 प्रतिशत अंक हासिल करने वाली ज्योति मूलरूप से प्रयागराज की निवासी हैं। ज्योति ने बताया कि पढ़ाई के लिए वह रोजाना 8-10 घंटे का समय देती थीं और अर्थशास्त्र की कोचिंग पढ़ती थीं। अगर कभी बोर होती थीं तो टीवी पर न्यूज डिबेट देखती थीं। टीवी सीरियल एवं फिल्मों से खुद को दूर रखा। आमतौर पर छात्र प्रतिदिन अलग-अलग विषय पढ़कर परीक्षा की तैयारी करते हैं लेकिन ज्योति का तरीका दूसरों से अलग था। ज्योति पढ़ाई के लिए वीकली प्लान तैयार करती थीं कि किस सप्ताह में किस विषय में कितने पाठ तैयार करने हैं। इसके बाद उन पाठों को निर्धारित समय में तैयार करती थीं। इसी तरीके ने उन्हें सफलता दिलाई और वह अपनी कामयाबी का श्रेय कड़ी मेहनत के अलावा माता-पिता एवं गुरुजन को देती हैं। ज्योति ने बताया कि वह सिविल सर्विसेज में सफल होकर समाज के सभी वर्गों के लिए काम करना चाहती हैं।
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रात की पढ़ाई ने कम समय में कराई ज्यादा तैयारी
बरेली। सेंट फ्रांसिस स्कूल की छात्रा कशिश वारसी 97.2 प्रतिशत अंक हासिल कर जिले की सेकेंड टॉपर बनी हैं। पिता नाजिम हुसैन की रेडीमेट गारमेंट्स की शॉप है। मां रुबीना तबस्सुम सरकारी शिक्षक हैं। सतीपुर में रहने वाली कशिश ने बताया कि अच्छी तैयारी के लिए वह अकाउंट्स और गणित की कोचिंग लेती थीं मगर घर में पढ़ाई करने पर खास जोर रहता था। घर पर रोजाना छह-सात घंटे तक पढ़ती थीं, खासतौर पर रात में ताकि कोई डिस्टर्ब न करे। कॉमर्स की छात्रा कशिश को संगीत और किताबें पढ़ने का शौक है। मगर परीक्षा के दौरान अगर बोरियत महसूस होती थी तो टीवी देखने के बजाय वह मां-पापा के साथ बिताती थीं। इससे मन बहलने के साथ ही उन लोगों से प्रेरणा मिलती थी। अब उनका लक्ष्य दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से बीकॉम ऑनर्स करना है। इसके लिए कड़ी तैयारी कर रही हैं। वह अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के साथ ही अपने सभी शिक्षकों को देती हैं।

कैंसर रोगी देखकर हुए प्रेरित, बनेंगे ऑन्कोलॉजिस्ट
बरेली। वीर सावरकरनगर के पास कृपाल एंक्लेव निवासी माणिक्य वर्मा ने 97 प्रतिशत अंकों के साथ जिले में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। माणिक्य वर्मा ने बताया कि उनके पिता नंदराम वर्मा एलआईसी में प्रशासनिक अधिकारी हैं और मां अनुपम वर्मा सहायक प्रशासनिक अधिकारी है। माणिक्य के ताऊ पीतमलाल वर्मा की कुछ समय पहले कैंसर से मौत हुई है। कैंसर का दर्द नजदीक से देखने के चलते वह ऑन्कोलॉजिस्ट बनकर इस पर रिसर्च करना चाहते हैं। पिछले दिनों बाल विज्ञान कांग्रेस में आलू के स्टार्च और एक्टिवेटेड चारकोल से बने फिल्टर प्रोजेक्ट को सराहना मिली थी। अब इसे ऑनलाइन होने वाले गूगल फेयर में प्रदर्शित किया जाएगा। माणिक्य अच्छे नंबर लाने के लिए घर में प्रतिदिन पांच से छह घंटे पढ़ाई करते थे।
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