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‘शिक्षा की गाड़ी डिरेल, अब पटरी पर लाना जरूरी’

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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग और इंडियन एसोसिएशन ऑफ टीचर एजुकेशन की ओर से ‘इंडियन टीचर एजुकेशन एट क्रासरोड्स: विदेरटो’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। इसमें राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की चेयरमैन और सीनियर आईएएस डॉ. सतबीर बेदी ने शिक्षा और टीचर एजुकेशन के हालात पर चिंता जाहिर की। मंच पर आते ही उन्होंने कहा कि शिक्षा की गाड़ी डिरेल हो चुकी है। अब इसे पटरी पर लाने का वक्त है। सिर्फ एक संस्था नहीं बल्कि सभी शिक्षक और जिम्मेदार लोगों को आगे आकर संयुक्त प्रयास करने होेंगे।
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अपने अनुभव साझा करते हुए डॉ. बेदी ने कहा कि वह बचपन से प्राइमरी स्कूल की टीचर बनना चाहती थीं। मां के कहने पर वह आईएएस की परीक्षा में बैठीं और आज इस मुकाम पर हैं। जब शिक्षक पहली बार स्कूल पढ़ाने पहुंचता है तो उसको समझ ही नहीं आता कि बच्चों से कैसे व्यवहार करें। बीटेक और एमबीए की तरह सिर्फ डिग्री देेकर छात्रों को बाहर नहीं निकालना है बल्कि उनको काबिल बनाना है। उन्होंने दिल्ली के टॉप के स्कूलों का जिक्र किया। बोलीं कि आज वहां स्कूली शिक्षा में ही आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को पढ़ाया जा रहा है। हमारे स्कूलों में ऐसी शिक्षा क्यों नहीं दी जा सकती। उन्होंने बताया कि बीएड कॉलेजों का मूल्यांकन का तरीका बदलने जा रहा है। इसका ऑनलाइन फॉर्मेट जल्द जारी किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश से आए प्रो. मनोज कुमार सक्सेना, अमरकंटक से आई प्रो. संध्या गिहार, बरेली के डॉ. आरके सिंह, प्रो. घंटा रमेश ने भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि शिक्षक अब शिक्षा को लेकर आत्मचिंतन करें। शिक्षा को मशीन न बनाकर छात्र केंद्रित प्रणाली बनानी होगी। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल ने शिक्षक और छात्र के बीच दूरी कम करने पर जोर दिया। इस दौरान प्रो. बीआर कुकरेती, प्रो. मोहम्मद मियां, प्रो. अनीता रस्तोगी, प्रो. एनएन पांडेय, प्रो. अमिता समेत बड़ी संख्या में शिक्षाविदों ने इसमें हिस्सा लिया। रिसर्च स्कॉलर ने शोधपत्र प्रस्तुत किए।

एनसीटीई की चेयरमैन को सौंपा गया मसौदा
तीन दिन चली राष्ट्रीय संगोष्ठी में शिक्षा से जुड़े तमाम अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। एक मसौदा तैयार किया गया, जिसे एनसीटीई की चेयरमैन डॉ. सतबीर बेदी को सौंपा गया। इसमें चार का बीएड कोर्स रोकने, बीएड कॉलेजों का मूल्यांकन, आईआईटी और आईआईएम की तरह शिक्षक एजुकेशन के लिए संस्थान, एमएड की यूनिट 50 से घटाकर 25 करने, बीएड और एमएड पाठ्यक्रमों के शिक्षकों के लिए एमएड अर्हता रखने जैसे कई मुद्दों पर मसौदा तैयार कर सौंपा गया।
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