बरेली। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में आयोजित स्किल डेवलपमेंट सेमिनार में भारतीय योग विज्ञान और नाड़ी शोधन कला पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। ऋषिकेश से आये डॉ. एलएन जोशी और डॉॅ. अर्पिता जोशी ने बताया कि नाड़ी शोधन योग विद्या के उपयोग से शरीर की अनेकों बीमारियों का प्राकृतिक रूप से इलाज किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस विधा से दवाई और ऑपरेशन के बिना शरीर की छोटी बड़ी बीमारियों का उपचार किया जा सकता है।
सेमिनार के दूसरे सत्र में कानपुर विश्वविद्यालय के शुभा सिंह यादव, जयपुर से आए डॉ. वीरेंद्र सिंह, हिंदू कॉलेज मुरादाबाद से आए विशेषज्ञों ने विचार रखे। कौशल क्षेत्रों के कारीगराें को आमंत्रित किया गया। बेंत, जरी जरदोजी, मांझा, सुरमा के कारीगरों ने अपने क्षेत्र की चुनौतियों के और समस्याओं के बारे में बताया। संयोजिका डॉ. अनीता त्यागी ने बताया कि कान्फ्रेंस में 85 शोध पत्र आए। मुख्य अतिथि ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉॅ. आरएस पुंडीर, विशिष्ट अतिथि आईवीआरआई के निदेशक डॉ. आरके सिंह, मुख्य वक्ता राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ ओमपाल सिंह, कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ल ने भी विचार रखे। ओमपाल सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति ने पारिवारिक संरचना बनाए रखना भी एक कौशल है। कार्यक्रम में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस दौरान ऐश्वर्या प्रसाद, तूलिका सक्सेना, डॉ. संजीव, आशुतोष पाठक, आयशा खान, आनंद सिंह आदि मौजूद रहे।
विधायक बोले, मेरे कहने का यह मतलब नहीं था
स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम में जेब काटने को हुनर बताने वाले विधायक राजेश मिश्रा पप्पू भरतौल ने कहा कि उनके कहने का यह मतलब नहीं था। उन्होंने सिर्फ यह कहा कि कोई हुनर छोटा नहीं होता। हर इंसान का अपना हुनर होता है। उन्होंने जेब काटने को हुनर नहीं बताया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पढ़े लिखे लोग उनकी बात का गलत मतलब निकालते हैं। यही विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों ने किया।