तीन तलाक और हलाला पीड़ित महिलाओं के लिए लड़ाई लड़ रही फरहत नकवी और निदा खान को पर्सनल लॉ बोर्ड जदीद के उलमा ने शरई मामलों पर न बोलने की हिदायत दी है। कार्यकारिणी की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि निदा और फरहत शरीयत पर सवाल खड़ा कर राजनीति करना चाहती हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौलाना रईस अशरफ ने कहा कि निदा खान को शरीयत पर बोलने का हक नहीं है। उन्हें कोई परेशानी है तो दारुल इफ्ता में आएं, उनकी बात सुनकर इंसाफ किया जाएगा। फरहत नकवी का अपना अलग मजहब है। वह अपने यहां महिला काजी बनाएं या कुछ भी करें, मगर सुन्नी मामलों में दखल न दें। पिछले दिनों आए अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री मोहसिन रजा और वक्फ बोर्ड चेयरमैन वसीम रिजवी के बयान के बारे में पूछने पर कहा कि वह तो मुसलमान ही नहीं है। उनके बारे कुछ कहना बेकार है।
बोर्ड अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा खां ने निदा खान को इस्लाम से खारिज करने के सवाल पर कहा बात सिर्फ निदा की नहीं है। इस्लाम की हुदूद हैं, उससे हटकर जो शरीयत के खिलाफ बात करेगा, वह खुद ही इस्लाम से खारिज हो जाएगा। महिला काजी के सवाल पर कहा कि इसका रास्ता निकाला जा सकता है, मगर ऐसी औरतों पर भरोसा नहीं किया जा सकता जिनका दोहरा चेहरा हो। वैसे भी कमजोर की मदद करने के लिए सड़कों पर आना जरूरी नहीं कि कोई प्रेस के सामने नकाब पहनकर आए और वैसे जींस पहनकर घूमे।