कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष मीता सती ने दिया इस्तीफा, आरोपों की होगी जांच
पांच पार्षदों के लाए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा ले पहले ही छोड़ दिया पद
उपाध्यक्ष पर लगे आरोपों पर 26 जून को बोर्ड बैठक में होगी बहस
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। कैै ंटोनमेंट बोर्ड की उपाध्यक्ष मीता सती ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए बुधवार को बुलाई गई विशेष बैठक से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बोर्ड ने पार्षदों द्वारा उन पर लगाए गए आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि आरोपों पर बहस के लिए 26 जून को कैंट बोर्ड की बैठक बुलाई गई है। बुधवार दोपहर करीब दो बजे बोर्ड की बैठक शुरू हुई लेकिन उपाध्यक्ष का इस्तीफा आने की वजह से अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हुई।
मीता सती पर लगाए गए आरोपों के संबंध में पार्षदों से बात की गई तो उनका कहना था कि उपाध्यक्ष को नियमानुसार ही काम करना चाहिए था, लेकिन मीता सती ने नियमों को अनदेखा किया। अब जब उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है तो कोई विवाद ही नहीं रह गया है। अविश्वास प्रस्ताव लाने के दौरान पार्षदों ने उपाध्यक्ष पर कैंट एक्ट की जानकारी न होने, बोर्ड की मीटिंगों पर ध्यान न देने, सिविल एरिया की प्रोसीडिंग की जानकारी न होने, ठेकेदारों और अन्य कर्मियों को ब्लैकमेल करने, खराब बर्ताव, पद की धमकी देने और बोर्ड के टेंडरों में रिश्वतखोरी के आरोप लगाए गए थे। बोर्ड ने इन आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं।
कैंट विधायक की मदद से बनीं थी उपाध्यक्ष
कैंट बोर्ड में भाजपा अपना उपाध्यक्ष चाहती थी। ऐसे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की इकाई सेवा भारती से जुड़ीं मीता सती को भाजपा में शामिल कर उपाध्यक्ष पद से नवाजा गया। उन्हें उपाध्यक्ष बनाने के लिए कैंट विधायक राजेश अग्रवाल ने पार्षदों का समर्थन जुटाया था। शर्त थी कि सवा साल के अंतराल पर दूसरे भाजपा पार्षद को उपाध्यक्ष बनने का मौका मिलेगा, लेकिन करीब साढ़े तीन वर्षों बाद भी मीता सती पद छोड़ने को तैयार नहीं हुईं तो पार्षद उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ले आए।