- केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के संयुक्त सचिव (भूमि अधिग्रहण) को भेजी गई शिकायत में दावा
बरेली। बीसलपुर-शाहजहांपुर हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना से कुछ ही दिन पहले ऐसे 15 भूखंडों के बैनामे हुए हैं, जिनका अधिग्रहण किया जाना है। इसके बाद इनमें से कुछ भूखंडों पर अस्थायी ढांचे भी तैयार किए गए। अगर मूल्यांकन के बाद मुआवजा बंट गया होता तो सरकारी खजाने को 75 करोड़ रुपये का चूना लग सकता था। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के संयुक्त सचिव (भूमि अधिग्रहण) को भेजी गई लिखित शिकायत में यह दावा किया गया है।
शिकायती पत्र में एनएचएआई से जुड़े दो आउटसोर्स कर्मियों और खरीदारों के नाम भी खोले गए हैं। खरीदारों में लखनऊ, रुद्रपुर, बहराइच के लोग भी हैं। 15 में से सात लोग ऐसे हैं, जिनका नाम बरेली-सितारगंज हाईवे के जमीन अधिग्रहण घोटाले में शामिल है। अच्छी बात यह रही कि इस हाईवे के लिए कोई भुगतान नहीं किया गया है। इस मामले में जांच एवं कार्रवाई की अपेक्षा की गई है। एक जिम्मेदार अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। अमर उजाला ब्यूरो