बरेली में होली के हुड़दंग में कुत्तों और बंदरों का आतंक भी शामिल रहा। त्योहार के अगले दिन ही सिर्फ तीन सौ बेड अस्पताल में 156 लोग एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने पहुंचे। इसमें 148 लोगों को कुत्तों ने और आठ को बंदरों ने काटा था। वहीं, फिजिशियन के पास वायरल की चपेट में आए 128 लोग इलाज के लिए पहुंचे। रंग, गुलाल आंख में पड़ने से हो रही तकलीफ से निजात के लिए कई लोग पहुंचे।
मंगलवार और बुधवार को होली के अवकाश के बाद गुरुवार को आधे दिन की ओपीडी रही। जिला अस्पताल में आम दिनों की तुलना में भीड़ आधे से भी कम रही। फिजिशियन, ऑर्थोपेडिक, बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी पर मरीजों की कतार लगी रही।
ज्यादातर बुखार, सर्दी, जुकाम, खांसी, नजला, बदन दर्द के मरीज पहुंचे। आंख जांच की ओपीडी तीन सौ बेड अस्पताल में न होने की जानकारी के चलते भी कुछ मरीज जिला अस्पताल पहुंचे थे, जिन्हें मौजूद गार्ड ने जानकारी देकर भेज दिया। पर्चा काउंटर पर 416 पर्चे बने थे। इनके अलावा कुछ लोग पुराने पर्चे पर भी इलाज कराने के लिए अस्पताल पहुंचे थे।
रंग पड़ने से आंखों में जलन, लालिमा
नेत्र रोग ओपीडी पर इलाज को पहुंचे करीब 70 मरीजों में दो दर्जन मरीज ऐसे थे, जिनकी आंख में रंग पड़ गया था या अन्य दिक्कत हो गई थीं। उन्हें आई ड्रॉप और आंखों पर पानी की छींटें डालने का सुझाव दिया गया। अस्पताल में दवा वितरण के लिए काउंटर खुला था। आधे दिन की ओपीडी होने के बावजूद एआरवी लगवाने पहुंच रहे लोगों के पर्चे दोपहर 12 बजे तक स्टाफ बनाता रहा।
तापमान में उतार-चढ़ाव बना रहा बीमार
तीन सौ बेड अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अकीक के मुताबिक होली पर गुलाल के बजाय ज्यादातर लोगों ने पानी से होली खेली। भीगे कपड़ों में ज्यादा देर रहने से सर्द, गर्म की चपेट में आ गए। इसके अलावा खानपान में सावधानी न बरतने से पेट में दर्द, लूज मोशन, अकड़न और गैस की तकलीफ भी हुई। उन्होंने लोगों को मौसम पूरी तरह परिवर्तित होने तक सावधानी बरतने का सुझाव दिया है।