बरेली। मसलकी नाइत्तफाकी के बावजूद देवबंदी मदरसों में पढ़ने वाले छह छात्रों की बरेलवी मसलक की दरगाह आला हजरत में आने की मंशा चाहे जो रही हो, लेकिन यहां आना उन्हें बहुत भारी पड़ गया। पहले तो दरगाह में हल्ला मचा कि संदिग्ध बांग्लादेशी युवक घुस आए हैं, वे कुछ सफाई देते इससे पहले ही भीड़ ने उन्हें घेरकर अच्छा-खासा पीट दिया। बांग्लादेशियों के दरगाह में पकड़े जाने की खबर पर सुरक्षा एजेंसियां भी चौकन्नी हो गईं। कोतवाली ले जाकर उनसे लंबी पूछताछ हुई। हालांकि इससे पहले दरगाह में ही साफ हो गया था कि पकड़े गए युवक महाराष्ट्र के लातूर जिले के हैं जो देवबंद के मदरसों में पढ़ते हैं। जांच-पड़ताल के बाद देर शाम पुलिस ने सभी युवकों को रिहा कर दिया।
दोपहर साढ़े तीन बजे दरगाह प्रबंधन की सूचना पर बिहारीपुर चौकी इंचार्ज देवेंद्र सिंह दरगाह पहुंचे जहां भीड़ ने छह युवकों को घेर रखा था। इन युवकों को कोतवाली लाकर पूछताछ की गई तो उन्होंने अपने नाम परवेज, अयाज, सलाहउद्दीन, अब्दुल करीम, मोहसिन और जुबैर बताए। बताया कि वे लोग महाराष्ट्र के लातूर जिले के अलग-अलग गांवों के रहने वाले हैं। देवबंद के अलग-अलग मदरसों में पढ़ते हैं और वहां एक ही कमरे में रहते हैं। जुबैर ने बताया कि उसके उस्ताद की बरेली के एक हकीम की दवा चल रही है। उस्ताद ने उसे दवा लाने बरेली भेजा था। अब्दुल करीम को भी खुद को हकीम को दिखाना था। उनके साथ बाकी लोग भी बरेली चले आए। यहां दोपहर साढ़े 12 बजे हकीम के यहां पहुंचे तो पता चला कि वह तीन बजे के बाद बैठेंगे। उन्होंने दरगाह आला हजरत का नाम सुन रखा था, लिहाजा दरगाह देखने और जुमे की नमाज पढ़ने के इरादे से वे दरगाह चले आए।
जुबैर ने पुलिस को बताया कि वह टॉयलेट करने छत पर गया तो वहां एक मौलाना ने उसका गला पकड़ लिया। उसे आतंकी और काफिर कहा। चिल्लाने की आवाज पर सलाहउद्दीन ऊपर पहुंचा तो उसकी भी पिटाई हुई। बाकी साथी नीचे खड़े रहे। थोड़ी देर में भीड़ ने उन्हें भी घेर लिया। पुलिस के पहुंचने के बाद उन्हें कोतवाली लाया गया। इंस्पेक्टर पंकज वर्मा ने देवबंद और महाराष्ट्र पुलिस से भी युवकों के संबंध में बात की और उनके नाम-पते की तस्दीक की। सब कुछ ठीक ठाक मिला तो देर शाम इन्हें छोड़ दिया। इससे पहले जमीतुल उलमा के सदर मुफ्ती अबू जफर भी कोतवाली पहुंचे और छात्रों को निर्दोष बताकर पुलिस से उन्हें छोड़ने को कहा। कोतवाली से छूटने के बाद काफी देर ये लोग साथ बैठकर सलाह-मशवरा करते रहे।
बरेली की तारीफ सुनी थी मगर अब कभी नहीं आएंगे
छात्रों ने बताया कि वे भले ही देवबंदी हैं लेकिन उन्हें हर धर्म और मसलक का सम्मान करना सिखाया गया है। उन्हें किसी और की इबादत या सजदे से तो परहेज बताया गया है मगर किसी धर्मस्थल पर घूमने और हाजिरी देने पर पाबंदी नहीं है। पिछले दिनों वे अमृतसर के स्वर्ण मंदिर गए तो वहां कोई समस्या नहीं आई। लंगर में अच्छा खाना खाया और आराम से रहे। यहां दरगाह के बारे में काफी सुना था। पिछले साल यहां से तौकीर मियां देवबंद जाकर उनके सदर मौलाना अशरफ मदनी से मिले थे। तभी से वे बरेली आकर दरगाह देखना चाहते थे मगर यहां आना बेहद खराब रहा। अब कभी बरेली नहीं आएंगे।
गलत बातें लिखवाईं, वीडियो बनाया
छात्रों ने आरोप लगाया कि दरगाह में उनके मसलक को लेकर गलत टिप्पणियां की गईं। उन्हें सादा कागज देकर अपने उलमा के बारे में गलत लिखने को मजबूर किया गया। मना किया तो पीटा। इस घटनाक्रम का वीडियो भी बनाया गया।
- युवक देवबंद के छात्र थे। दरगाह में घूमने के दौरान उनकी कहासुनी हो गई। दोनों पक्षों का आपसी विवाद था जो निपट गया। किसी ने तहरीर नहीं दी। युवकों के नाम-पते तस्दीक करने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। - अभिनंदन सिंह, एसपी सिटी