बरेली। जिला शुक्ल कमेटी स्कूलों के रिकॉर्ड खंगाल रही है, इसमें कई रिकॉर्ड चौंकाने वाले सामने आ रहे हैं। सोसाइटी और ट्रस्ट से संचालित होने वाले अधिकतर स्कूल मोटी कमाई के लिए हर साल फीस वृद्धि क्यों कर रहे हैं, जबकि उनका मकसद सामाजिक कार्य है। ऐसे स्कूलों की सालाना आय करोड़ों में बैठ रही है। चूंकि मंडलीय समिति की जांच रिपोर्ट को जिला समिति ने खारिज कर दिया है, लिहाजा अब फिर से सारे रिकॉर्ड का परीक्षण किया जा रहा है। यानी इसमें लंबा वक्त लगेगा। इसका मतलब है कि अभिभावकों को जल्द राहत मिलना मुश्किल है। स्कूलों से दोबारा रिकॉर्ड भी मांगा जा सकता है।
जिला शुल्क कमेटी 36 स्कूलों की रिकॉर्ड की जांच कर रही है। इसमें 2015 में ली जा रही फीस को आधार माना गया है। स्कूलों के रिकॉर्ड देखने पर पता चला कि नो प्रोफिट-नो लोस पर चलने की बात कहने वाले स्कूलों में करोड़ों का मुनाफा कमाया जा रहा है। मोटी कमाई के लिए स्कूल हर साल फीस बढ़ाते हैं, जबकि स्कूलों का पूरा पैसा स्कूल पर ही खर्च होना चाहिए। जांच में यह बात भी सामने आई कि खुद को सही साबित करने के लिए स्कूलों ने अलग-अलग मदों में फीस दिखाई। सोसाइटी एक्ट का भी पालन नहीं हो रहा है। अभिभावक प्रतिनिधि अंकुर सक्सेना का कहना है कि अगर स्कूल लाभ कमा रहे हैं तो फीस क्यों बढ़ा रहे हैं, इसलिए सारे बिंदुओं की जांच के बाद ही फीस वृद्धि का सही आंकलन हो सकेगा। अगर जल्दबाजी में फैसला होता है तो अभिभावकों को ज्यादा राहत नहीं मिलेगी।
अधिकारी व्यस्त तो कौन करेगा जांच
अब बोर्ड परीक्षाएं आने वाली है जिनके लिए डीआईओए व्यस्त रहेंगे। लेखाधिकारी के पास तीन जगहों का चार्ज है। अन्य सदस्य भी व्यस्त। अब सवाल उठता है कि रिकॉर्ड की जांच कैसे होगी और समायोजन का आदेश कब जारी होगा। जबकि आखिरी क्वार्टर की फीस स्कूल जमा कराने की तैयारी में हैं।
किताबों का मुद्दा भूल गए अफसर
अप्रैल में नया सत्र शुरू हो जाएगा और उसके बाद किताबों के नाम पर लूट शुरू होगी। अभी तक किसी भी स्कूल ने किताबों की सूची अपनी वेबसाइट पर अपलोड नहीं की है। सत्र शुरू होने के बाद स्कूल मनमाना सिलेबस थापेंगे। जबकि इस बार तय हुआ था कि स्कूल किताबों की सूची अपनी वेबसाइट पर अपलोड करेंगे।
जिल समिति की बैठक हो चुकी है। डीआईओएस, सीए और अभिभावक संघ के प्रतिनिधि रिकॉर्ड का परीक्षण कर रहे हैं। समायोजन का आदेश भी जल्द जारी हो जाएगा। - वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम
स्कूल भी चाहते हैं कि फीस मामला जल्द निपटे। बड़ी संख्या में अभिभावकों ने फीस नहीं जमा की है। समिति जल्द अपना निर्णय ले। - पारुष अरोड़ा, अध्यक्ष इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन
कार्रवाई चल रही है। काफी हद तक रिकॉर्ड का परीक्षण कर लिया गया है। जल्द फीस समायोजन का आदेश जारी किया जाएगा। - डॉ. अचल कुमार मिश्रा, डीआईओएस