केरल में सबरीमाला मंदिर के दरवाजे अब हर उम्र की महिलाओं के लिए खुल गए हैं। धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के जाने न जाने को लेकर हमेशा विवाद रहा है। इस संदर्भ में बात करें तो बरेली में एक मस्जिद ऐसी है जहां महिलाएं नमाज अदा करती हैं। काजीटोला स्थित इस मस्जिद में बीस साल से महिलाएं नमाज अदा कर रही हैं।
मस्जिद में महिलाओं के नमाज अदा करने पर हर मसलक में अलग-अलग कायदे हैं। यही वजह है कि आमतौर पर मुस्लिम महिलाएं नमाज अदा करने के लिए मस्जिद में नहीं जाती हैं। अलबत्ता बरेली में एक मस्जिद में मुसलमान औरतें नमाज पढ़ने के लिए आती हैं। यह मस्जिद काजीटोला में अहले हदीस की जामा मस्जिद है। इसे मोहम्मदी मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है। मस्जिद में हर जुमे को नमाज पढ़ने के लिए मुस्लिम औरतें आती हैं। इनके लिए मस्जिद की छत पर अलग से इंतजाम किया जाता है। वहां सिर्फ महिलाएं ही होती हैं। इनका रास्ता भी अलग से है। नीचे के हिस्से में मर्दों के लिए इंतजाम होता है। नमाज पढ़ाने के लिए पेश इमाम नीचे मर्दों वाले हिस्से में रहते हैं। पेश इमाम मौलाना मोहम्मद मुस्तकीम सलफी ने बताया कि जुमे के अलावा मस्जिद में रमजान भर तरावीह और ईद-बकरीद की नमाज पढ़ने के लिए भी औरतें आती हैं। जुमा को डेढ़ सौ से ज्यादा महिलाएं नमाज अदा करने आती हैं। हालांकि मस्जिद में महिलाओं को पांचों वक्त की नमाज के लिए इंतजाम अभी नहीं हैं, लेकिन इसे भी जल्दी ही शुरू किया जा सकता है। मस्जिद में महिलाओं के नमाज पढ़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हदीस है कि यहां इबादत के लिए ख्वातीन आ सकती हैं। अहले सुन्नत वल जमात के मसलक के मुताबिक ख्वातीन को मस्जिद में जमात के साथ नमाज अदा करने की इजाजत नहीं है। उनके लिए हनफी उलमा ने यही हुक्म दिया है कि वे घरों में नमाज अदा करें। अहले हदीस मसलक में यह बात जरूर है कि औरतें मस्जिद में जमात के साथ नमाज अदा कर सकती हैं। - मौलाना शहाबुद्दीन, महासचिव, तंजीम उलमाए इस्लाम