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उमस और गर्मी से फिर हाहाकार, पारा फिर 35 पार

Fri, 06 Jul 2018 12:53 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
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जुलाई के शुरूआती दो दिन बारिश के बाद एक बार फिर उमस और गर्मी लोग बिलबिलाने लगे हैं। मानसून आने के बाद भी बारिश नहीं हो रही है। सूरज भी आंखें तरेर रहा है। इससे उमस भरी गर्मी पैदा हो रही है। अभी कम से कम चार दिन और भीषण गर्मी, तपिश झेलनी होगी। मानसून से पहले बारिश होने की वजह से सब्जियां महंगी हैं, वहीं आम और केला छोड़कर बाकी फलों के दाम भी आसमान छू रहे हैं।
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बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 35.1 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से एक डिग्री कम था, जबकि न्यूनतम तापमान दो डिग्री सेल्सियस बढ़कर 26.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। सुबह से ही चटक धूप खिलने से दोपहर दो से शाम चार बजे के बीच गर्मी का रौद्र रूप सामने आया। तापमान अधिक न बढ़ने के बाद भी उमस से लोग बिलबिला उठे। मौसम विभाग ने अभी तापमान तीन से चार डिग्री सेल्सियस और बढ़ने की भविष्यवाणी की है। इससे कम से कम तीन दिन तक बेतहाशा गर्मी पड़ेगी। इसके बाद मौसम बदलेगा। पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एचएस कुशवाहा ने बताया कि तीन दिन गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। इस दौरान हल्के बादल रहेंगे, मगर बारिश नहीं होगी। नौ जुलाई तक अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 25 डिग्री से अधिक रहने की उम्मीद है।


आम और केला छाया, बाकी फलों को भुलाया
मानसून से पहले की बारिश से जहां सब्जियां महंगी हैं, वहीं फलों के नाम पर मार्केट में सिर्फ आम और केला छाया हुआ है। बाकी फल बाजार से गायब हैं। अगर यदा-कदा कहीं दिख भी जाएं तो उनके दाम आसमान छूने लगे हैं। थोक मंडी डेलापीर में दशहरी, बंबई, लंगड़ा, चौसा और देसी आम 15 से 25 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। वहीं केला आठ से 14 रुपये प्रति दर्जन है। इनके अलावा जामुन 70 से 80 रुपये प्रति किलो फुटकर में बिक रही है। फल मंडी एसोसिएशन अध्यक्ष आफताब भाई का कहना है कि अन्य फलों में सेब, संतरा, नाशपाती आदि फल बाहर से मंगवाए जा रहे हैं। इनकी कीमत 140 रुपये प्रति किलो या इससे अधिक है। फुटकर मार्केट में भी आम और केला छोड़कर बाकी फल नाममात्र को ही दिखते हैं। लीची 100 रुपये से ऊपर बिक रही है।
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भिंडी-तोरई ने जमाई मंडी पर धाक
मानसूनी सब्जियां दो से ढाई गुनी तक महंगी हो चुकी हैं। डेलापीर सब्जी मंडी एसोसिएशन अध्यक्ष शुजाउर्रहमान का कहना है कि कुछ सब्जियां महंगी हैं, लेकिन थोक मंडी से सब्जियां लाकर फुटकर मंडियों में बेचने वाले फड़ या ठेले वाले ज्यादा दामों में सब्जियां बेचकर कीमतों में भारी अंतर पैदा कर रहे हैं। इस पर अंकुश लगाने की जरूरत है। फुटकर मंडियों और ठेलों पर ज्यादा कीमतें वसूलने के बावजूद घटतौली भी हो रही है। बाट-माप विभाग के अफसर और स्टाफ दफ्तरों से बाहर नहीं निकल रहा है।
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