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अधिकारी सूचनाएं नहीं दे रहे इसलिए आयोग में मामलों की भरमार
आयोग ने तीन साल में 1.15 लाख मामलों का किया निस्तारण
कहा- सूचना देने में राइट टू प्राइवेसी का भी रखा जाए ख्याल
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
राज्य सूचना आयुक्त विजय शंकर शर्मा ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत लोगों को सूचनाएं न देने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सूचना देने में अधिकारियों के हीलाहवाली करने की वजह से सूचना आयोग में ऐसे मामलों की भरमार हो गई है। हालांकि आयोग ने तेजी दिखाते हुए तीन साल में 1.15 लाख लंबित मामलों को निस्तारित किया है।
राज्य सूचना आयुक्त ने कलेक्ट्रेट सभागार में जनसूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारियों के साथ आरटीआई के मुद्दे पर बैठक की। उन्होंने कहा कि 2015 में बनी सूचना का अधिकार अधिनियम की नियमावली से जनसूचना अधिकारियों की तमाम शंका का समाधान हुआ है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उनका दायित्व सूचना देना है, न कि उसे छिपाना। जो रिकार्ड में उपलब्ध है, वही देना हैं। नई सूचनाएं बनानी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि स्वीडन में वर्ष 1766 में आरटीआई लागू किया गया था लेकिन अब 98 देशों में यह कानून लागू है।
सूचना आयुक्त ने निर्देश दिया कि आरटीआई की सूचनाएं अधिकृत कागज पर ही दी जाएं। विजय शंकर शर्मा ने बताया कि बीपीएल आवेदकों के लिए सूचनाएं मांगने की कोई फीस नहीं है। सूचना मांगने वाले फार्म पर पांच सौ से ज्यादा शब्द नहीं होने चाहिए। किसी भी व्यक्ति की सूचना देने में राइट टू प्राइवेसी का ख्याल भी रखा जाए। इस तरह की सूचनाएं न देने की छूट है, जिससे न्यायालय की अवमानना या संसद के विशेषाधिकारों का हनन हो रहा हो। इस मौके पर अपर आयुक्त प्रशासन राममूर्ति पांडे, डीएम आर विक्रम सिंह, सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने भी आरटीआई को लेकर अधिकारियों को कई जानकारियां दीं।
बीडीए और पुलिस की सबसे ज्यादा मामले
राज्य सूचना आयुक्त विजय शंकर शर्मा ने बताया कि सूचनाएं न देने वालों में बीडीए और पुलिस विभाग सबसे ज्यादा लापरवाह हैं। हालांकि कई दूसरे विभागों में भी मामले लंबित हैं। कलेक्ट्रेट में हुई पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि सभी कार्यालयों में जनसूचना अधिकारी के बोर्ड लगे हों ताकि सूचना मांगने वाला भ्रम में न रहे। सभी विभागों से शिकायतों आने और निस्तारित होने का रिकार्ड तैयार करने को कहा दिया गया है। उन्होंने कहा कि आरटीआई में सूचना न देने वाले अधिकारियों पर हर दिन 25 सौ रुपये का जुर्माना लगेगा। इसे लेकर आयोग अब सख्त है।