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Bareilly News: आग के मुहाने पर शहर के 139 अस्पताल

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बरेली। शहर के 139 अस्पताल आग के मुहाने पर हैं। यहां आग से बचाव के इंतजाम नहीं है। लखनऊ स्थित संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के ऑपरेशन थिएटर में आग लगने के बाद डिप्टी सीएम ने प्रदेशभर के अस्पतालों में अग्निशमन व्यवस्था का सेफ्टी ऑडिट करने के निर्देश दिए हैं। अमर उजाला की टीम ने स्थानीय स्तर पर अस्पतालों की पड़ताल की तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। सरकारी व निजी दोनों तरह के अस्पतालों में अग्निशमन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। आग लगने पर मरीजों व तीमारदारों को बाहर निकालने के लिए वैकल्पिक इंतजाम भी नहीं हैं। मानकों की अनदेखी कर खड़ी की गई इमारतें कभी भी मरीजों की जान सांसत में डाल सकती हैं।
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अग्निशमन विभाग ने करीब चार माह पहले जिले के सरकारी, निजी अस्पतालों का सेफ्टी ऑडिट किया था। इसमें मानसिक चिकित्सालय, महिला अस्पताल समेत शहर-देहात के 139 निजी अस्पताल में अग्निशमन व्यवस्था के पर्याप्त इंतजाम नहीं मिले थे। सीएफओ चंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि नोटिस जारी होने पर मानसिक चिकित्सालय, महिला अस्पताल में व्यवस्था दुरुस्त हो गई। वहीं, 22 निजी अस्पतालों ने भी व्यवस्था सुधार ली पर 100 से अधिक अस्पताल अब भी आग के मुहाने पर हैं।
पिछले माह महिला अस्पताल की एमसीएच विंग के स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में आग लगने से धुआं भर गया था। तेज धमाके के साथ भवन में लगे कई उपकरण फुंक गए थे। वहां भर्ती 11 नवजातों को बदायूं मेडिकल कॉलेज शिफ्ट कराने में एक की मौत हुई थी। डीएम ने जांच कमेटी गठित की थी। इसमें शौचालय से सटकर विद्युत नियंत्रण कक्ष बने होने से भविष्य में भी शॉर्ट सर्किट होने और आग लगने की आशंका जताई गई थी। साथ ही, जगह-जगह डि्रलिंग करने से मना किया था। इसके बाद भी अफसर नहीं चेते। जांच टीम के सुझाव रिपोर्ट तक ही सीमित हैं। सुधार के कार्यों के लिए उच्चाधिकारियों के निर्देश का इंतजार हो रहा है। वहां के जो हालात हैं, कभी भी शॉर्ट सर्किट से आग भड़क सकती है।
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प्रथम दृष्टया दोषी बिजली मिस्त्री और ठेकेदार ने सोमवार को जवाब सौंपा है। हालांकि, जवाब में क्या कहा, इस जानकारी को साझा करने से सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद ने इन्कार कर दिया। जवाब के आधार पर रिपोर्ट बनाकर डीएम को सौंपने की बात कही है। कहा कि जो सुझाव दिए थे, उनमें कई कार्य हो चुके हैं। शौचालय, विद्युत नियंत्रण कक्ष संबंधित सुझाव के लिए उच्चाधिकारियों की संस्तुति का इंतजार है।
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