फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ये रिहायशी इलाका तो कामर्शियल से भी महंगा है

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। दो दशक पहले जब बीडीए ने 2021 तक शहर को व्यवस्थित तरीके से बसाने के लिए अपना मास्टर प्लान बनाया था तो किसी को यह उम्मीद नहीं होगी कि शहर इस तरह अव्यवस्थित हो जाएगा। अब चौकी चौराहा से सिविल लाइंस रोड को ही लीजिए। मास्टर प्लान में रोड के आस-पास का इलाका रिहायशी है, लेकिन मौके पर देखते ही किसी को भी लगेगा कि यह रिहायशी इलाका तो 80 फीसदी से ज्यादा कामर्शियल हो चुका है। यहां की जमीन शहर के किसी भी कामर्शियल इलाके से कहीं अधिक महंगी है।
विज्ञापन

अमर उजाला ने अपने लाइव अभियान में सोमवार को सिविल लाइंस से चौकी चौराहा तक का रोड शामिल किया। चौकी चौराहा से बदायूं रोड जाने वाली बसें इसी मार्ग से होकर गुजरती हैं। चौराहे से नीचे उतरते ही कांपलेक्स नुमा एक बड़ी बिल्डिंग बनी है। उसमें प्रतिष्ठित मिष्ठान की दुकान के अलावा अन्य कई तरह के व्यापार चल रहे हैं। चंद कदम दूर पर गुरुद्वारा बना है। उसके आगे कमिश्नरी है। इसमें मंडलायुक्त, अपर आयुक्त प्रशासन, संयुक्त विकास आयुक्त, संयुक्त आयुक्त कृषि समेत तमाम अफसरों के दफ्तर हैं। कमिश्नरी परिसर में ही स्मार्ट एसी शौचालय बनाया गया है। कमिश्नरी खत्म होते ही एक भव्य आलीशान बिल्डिंग है, जिसमें ज्वैलरी शोरूम है। इसी लाइन में अगल-बगल में कम से कम आठ शोरूम और कांपलेक्स खुले हैं। इनमें कम से कम 70 से 80 दुकानें खुली हैं। बेकरी और बियर शॉप की दुकानें हैं। एक अन्य तीन मंजिला कांपलेक्स में दर्जनों दुकानें किराए पर उठी हैं। इसी रोड पर तीन नर्सिंग होम और एक क्लीनिक है। सर्किट हाउस चौराहा से एसएसपी आफिस रोड के अंदर भी तीन से चार चिकित्सक अपने-अपने आवासीय भवन बनाकर उनमें नर्सिंग होम चला रहे हैं। ज्यादातर नर्सिंग होम ने पार्किंग नहीं बनाई है। मरीजों के वाहन सड़क के किनारे खड़े होते हैं। कांपलेक्स और शोरूम का भी यही हाल है। न फ्रंट छूटा है, न ही सेट बैक। 90 फीसदी व्यवसायिक निर्माण प्राधिकरण नियमों के विरुद्ध हुए हैं।
वहीं रोड के दूसरी ओर पीडब्ल्यूडी का स्टोर है। बीच में पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर का बंगला बना है। बगल में गेस्ट हाउस। फिर कर्मचारियों की आवासीय कॉलोनी। सिंचाई विभाग के दफ्तर भी इसी मार्ग पर हैं। उसके आगे शारदा नहर खंड के दफ्तर हैं। सरकारी विभागों के ऑफिस भवन खत्म होते ही तीन प्राइवेट बैंकों के ऑफिस इसी रोड पर हैं। तीन से चार कांपलेक्स इसी मार्ग पर हैं। दो डॉक्टरों के क्लीनिक भी हैं। सर्किट हाउस चौराहा के आस-पास फलों के ठेले लगते हैं। सिविल लाइंस तक एडीजी, आईजी, एसएसपी आवास बने हैं। उसके आगे मोड़ तक रिहायशी आवासों में बेकरी, जरनल स्टोर आदि की दुकानें खुली हैं। एक राजनीतिक दल का कार्यालय भी यहीं है। वीआईपी एरियामें कामर्शियल गतिविधियां संचालित होती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें