बरेली। मंडल की सेकेंड टॉपर वैशाली कहती हैं कि उन्होंने जितनी मेहनत की, रिजल्ट उससे कहीं बेहतर आया है और वह काफी खुश हैं। मेहनत का ज्यादा एहसास इसलिए भी नहीं हुआ क्योंकि परीक्षा के दिनों में दिनरात एक करने के बजाय वह साल भर रोजाना करीब चार घंटे पढ़ती रहीं। एग्जाम शुरू हुए तो सब्जेक्ट के मुताबिक सिलेबस रिवाइज करना शुरू किया। परफार्मेंस को लेकर मन में घबराहट भी थीं। मगर पेरेंट्स और टीचर्स ने मार्क्स के चक्कर में पड़ने के बजाय अच्छे से परीक्षा देने की सलाह देकर उनका यह तनाव दूर कर दिया। फिर भी कभी घबराहट होती थी तो उसे दूर करने के लिए म्यूजिक सुनती थी। वैशाली के मुताबिक पढ़ना उन्हें बेहद पसंद है। ब्रिटिश राइटर जेके रोलिंग उनके फेवरेट हैं। बड़ा बाजार के राजवर्धन और नीरजा की बेटी वैशाली कहती हैं इंग्लिश का पेपर टफ था, उसमें 92 मार्क्स मिले, लेकिन दूसरे सब्जेक्ट में मिले 100 मार्क्स ने यह कमी पूरी कर दी। अब वह बीकॉम ऑनर्स करेंगी।
मां की उम्मीदें पूरी करने के लिए की खूब मेहनत
अलीजा शम्सी, 98.25 प्रतिशत मंडल की थर्ड टॉपर
बरेली। जिले की थर्ड टॉपर अलीजा शम्सी कहती हैं कि मां को पहले से उम्मीद थी कि वह टॉप करेंगी और उन्होंने इस उम्मीद को पूरा करने में कोई कोर कसर भी बाकी नहीं रखी। बड़ा बाजार के रहने वाले शाकिर हुसैन और सुबूही आरा की बेटी अलीजा के मुताबिक परीक्षा के दिनों में वह घर पर करीब आठ घंटे तक पढ़ती थीं। सामान्य तौर पर भी कम से कम पांच घंटे पढ़ाई जरूर करती थीं। परीक्षा की तैयारी शुरू की तो स्मार्ट फोन उठाकर एक तरफ रख दिया। दिमाग हल्का रखने के लिए कुछ समय पसंदीदा गीत गुनगुना लेतीं। बताया कि इंग्लिश का पेपर टफ था इसलिए उसमें कम मार्क्स रह गए। हालांकि अन्य सब्जेक्ट में अच्छे मार्क्स मिलने से यह कमी पूरी हो गई। एग्जाम के दौरान बैडमिंटन से थोड़ा दूर रहीं लेकिन संगीत सुनकर खुद को बोर होने से बचाया। अलीजा इंजीनियर बनना चाहती हैं। जूनियर्स को मेहनत से अच्छे मार्क्स लाने की सलाह दी है।