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एमएससी और बीटेक वाले भी सिपाही बनने को कतार में

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बरेली। बेरोजगारी युवाओं के सपने किस कदर तोड़ रही है यह पुलिस भर्ती दौड़ में साफ पता लग रहा था। लिखित परीक्षा पास करके दौड़ लगाने वाले युवाओं में बीटेक, बीएड व एमएससी पास अभ्यर्थी भी शामिल थे। अमर उजाला से बातचीत के दौरान कई ने बताया कि सिपाही बनने के बाद उनके पास आजीविका का एक पक्का आधार हो जाएगा।
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कासगंज के पटियाली से आए नितिन यादव ने वह गणित से एमएससी, डीएलएड और बीटीसी हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग पढ़ाते हैं। अक्सर स्टूडेंट सवाल करते हैं कि मास्साब खुद ही कोई कंपटीशन नहीं निकाल सके तो हमारा क्या होगा। वह केवल अपने स्टूडेंट को दिखाने के लिए यह परीक्षा पास करेंगे, चाहे नौकरी न करें।

हाथरस के गजेंद्र ने बताया कि कंप्यूटर साइंस से बीटेक हैं। पहले सिपाही बन जाएं फिर प्रतियोगी परीक्षाएं देकर दूसरी नौकरी खोज लेंगे। दरोगा बनने का भी विकल्प खुल जाएगा।
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बिजनौर के धामपुर की रितिका बीएससी बीएड हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षिका बनना उनका सपना है पर पहले सिपाही बनने में क्या हर्ज है। यही सोचकर कंपटीशन दिया है।

मुरादाबाद की रानू बीएससी मैथ हैं। वह अगवानपुर के कॉलेज से बीटीसी कर रही हैं। रानू ने बताया कि बीटीसी के बाद भी शिक्षक बनने को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इससे पहले अगर सिपाही बन गईं तो फिजूल खर्च और समय बर्बादी से बच जाएंगी।
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