बरेली। मनरेगा में अब पुरुषों के साथ कृषि क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं की भागेदारी बढ़ाई जाएगी। इनके लिए अलग से मस्टर रोल बनेगा। ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार के लिए महिला किसानों को खेत में तालाब खुदवाने और वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाने के अलावा कृषि फार्म मिशनरी बैंक की स्थापना के लिए मनरेगा से बजट दिया जाएगा।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के सवा दो लाख से ज्यादा जॉब कार्ड पंजीयन में अब तक महिला श्रमिकों की भागेदारी 15 फीसदी से भी कम है। सरकार महिलाओं की भागेदारी 35 प्रतिशत से अधिक करना चाहती है। इसके लिए शासन ने महिलाओं के अधिक से अधिक जॉब कार्ड बनाने और अलग से मस्टर रोल रखने के निर्देश दिए हैं। ग्राम प्रधानों को मनरेगा से स्वीकृत किसी भी प्रोजेक्ट में महिलाओं को रोजगार देने में वरीयता देनी होगी। अगर कोई महिला जॉब कार्डधारक मनरेगा में रोजगार के लिए आवेदन करती है तो पुरुषों की तुलना में गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने में प्राथमिकता दी जाएगी।
फार्म मिशनरी बैंक में भी वरीयता
महिला स्वयं सहायता समूहों को कृषि विभाग की ओर से ब्लॉकों में खोले जाने वाले फार्म मिशनरी बैंक में भी वरीयता दी जाएगी। कृषि विभाग प्रत्येक ब्लॉक में रबी और खरीफ की खेती के किसानों को आधुनिक तरीके सिखाने के लिए एक फार्म मिशनरी खोला जाता है। पहले प्रगतिशील किसान को फार्म मिशनरी बैंक खुलवाकर उसे सरकार सब्सिडी पर कृषि उपकरण उपलब्ध कराती थी, लेकिन अब महिला किसान समूह बनाकर फार्म मिशनरी बैंक के लिए आवेदन कर सकती हैं। प्रत्येक मिशनरी बैंक की लागत 16 लाख है। इसमें आठ लाख तक की सब्सिडी मिलेगी।
मनरेगा में महिला श्रमिकों की भागेदारी बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता में है। अब इनके लिए अलग से मस्टर रोल बनेगा। महिला जॉब कार्डधारकों को रोजगार में वरीयता दी जाएगी। महिला समूहों को वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाने में भी मनरेगा से बजट मिलेगा। - सत्येंद्र कुमार, सीडीओ