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जिम्मेदारी लेने के बाद भी आधार कार्ड नहीं बना रहे बैंक

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बरेली।
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फर्जी दस्तावेजों से आधार कार्ड न बन सकें, इसके लिए सरकार ने बैंकों को आधार कार्ड बनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। आरबीआई के आदेश के बाद बैंकों को अपनी दस फीसदी शाखाओं में सेंटर शुरू कर लोगों के आधार बनाने का काम शुरू करना था। आरबीआई ने ऐसा न करने वाले बैंकों पर रोजाना दो हजार रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया था। तमाम बैंकों ने अब तक आधार सेंटर की शुरूआत नहीं की है। इसके बावजूद किसी भी बैंक के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
साइबर कैफे सहित अन्य प्राइवेट जगहों पर आधार कार्ड बनाने में काफी फर्जीवाड़ा हो रहा था। सरकार के पास इसे लेकर लगातार शिकायतें पहुंच रही थीं। लिहाजा आधार बनाने की मुहिम में बैंकों को शामिल किया गया। बैंकों को अपनी कम से कम दस फीसदी ब्रांचों में आधार केंद्रों को शुरू करके वहां आम लोगों के आधार कार्ड बनाने हैं, लेकिन बैंकों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा की कुछ शाखाओं को छोड़ दें तो ज्यादातर बैंकों ने इस काम में कोई दिलचस्पी ही नहीं ली है। लापरवाह बैंकों की अब तक न तो कोई मानीटरिंग की गई है और न ही किसी तरह के जुर्माने की कार्रवाई हुई है।
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बैंकों में ढीली पड़ी एकाउंट को आधार से जोड़ने की मुहिम
सुप्रीम कोर्ट ने खातों को आधार से जोेड़ने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है तो बैंकों ने भी इस मुहिम को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। हालांकि बैंकों का दावा है कि 80 फीसदी से ज्यादा खातों को आधार से जोड़ने का काम पूरा कर लिया गया है। लोगों के लिए आधार से लिंकअप करना इसलिए भी जरूरी हैं, क्योंकि पेंशन, आवास सहित अन्य योजनाओं का लाभ पाने के लिए उनके खाते आधार से जुड़े होने चाहिए। बैंक नए खातों के लिए भी आधार मांग रही है।
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बैकों को आधार बनाने काम शुरू करना चाहिए। इसलिए सूचना मांगी जा रही है कि कितने बैंकों ने अब यह सुविधा लोगों को देना शुरू की है। - ओपी बढ़ेरा, लीड बैंक मैनेजर
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