तुम्हारे लिए रहमत की वजह, तुम्हारी बख्शिश का सबब। कर लो खुदा को राजी तो मुझे अब अलविदा कह दो। मैंने तुम्हें चलना सिखा दिया, मंजिल का पता बता दिया। मैं न चल सकूंगा तुम्हारे साथ अब अलविदा कह दो। अलविदा अलविदा ऐ माहे रमजान अलविदा।
माहे रमजान की अलविदा आखिरी जुमा की नमाज के तौर पर अदा की गई। इस कड़ी की सबसे बड़ी जमात यहां किला स्थित शाही जामा मस्जिद में हुई। जो शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम ने अदा कराई। आखिर में मुल्क के अमन-ओ-इत्तेहाद और खुशहाली की दुआ के साथ नमाज पूरी हुई। यहां पर लगभग 20 हजार लोग नमाज में शामिल हुए। नमाजियों की भीड़ का आलम ये था कि मस्जिद फुल, आंगन फुल, छत फुल, बाहर के रास्ते फुल और आसपास के मकानों की छतों तक पर नमाजी नजर आए। नमाजियों ने रोजा रख कर भूख प्यास की परवाह किए बगैर तेज भूप में नमाज अदा की। अलबत्ता मस्जिद में जरूर टेंट लगा था मगर आसपास के इलाके खुले हुए थे। नमाजियों को बस धुन थी तो किसी तरह नमाज में शामिल होने की।
यह स्थिति दरगाह आला हजरत स्थित रजा मस्जिद सहित शहर में कई जगह देखने को मिली। जहां लोगों ने छतों पर धूम में नमाज पढ़ी। दरगाह आला हजरत की रजा मस्जिद में शहर की सबसे आखिरी नमाज अदा हुई। यहां ताजुश्शरिया मुफ्ती अख्तर रजा खां (अजहरी मियां) ने नमाज अदा कराई। इससे पहले शहर काजी मौलाना असजद रजा खां कादरी ने खुतबा पढ़ा। इसी तरह कांकर टोला की नूरानी मस्जिद में शाम चार बजे नमाज अदा हुई। इसके अलावा सराय खाम की जामा मस्जिद, मदरसा काशीफुल उलूम मस्जिद, शिया जामा मस्जिद सहित नौमहला मस्जिद, खानकाह नियाजिया, अस्ताना मोहम्मदिया की चांद मस्जिद, बिहारीपु की बीबी जी मस्जिद, सैलानी की हबीबिया मस्जिद, मिर्जा मस्जिद, कचहरी मस्जिद, जंक्शन की नूरी मस्जिद आदि में बड़ी तादात में लोगों ने नमाज पढ़ी।
ईद का एहसास करा गया अलविदा
अलविदा की नमाज के साथ ही रमजान ने रुखसत होते-होते छोटी ईद जैसा एहसास भी करा दिया। जब तमाम लोग नए कपड़ों में नमाज अदा करने सड़कों पर दिखाई दिए। साथ में बच्चे भी नए कपड़ों में सजे धजे अपने बड़ों को साथ नमाज के लिए निकले। जो सुबह से ही तैयारियों में लगे थे। इस मौके पर जामा मस्जिद मलूकपुर नाला आदि में छोटे-छोटे मेले भी लगाए गए। जहां नमाज के बाद बच्चों ने पहुंच कर झूलों खेल खिलौनों और खान पान का लुत्फ लिया।