बरेली। फोन और अनियमित दिनचर्या नींद में बाधा बन रही है। इससे युवा मनोविकार और शारीरिक समस्याओं की चपेट में हैं। टेलीमानस रिपोर्ट के तहत 13 फीसदी लोग नींद न आना, बार-बार नींद टूटना, कम समय की नींद और सुबह उठने पर थकान जैसी दिक्कत से जूझ रहे हैं।
जिला अस्पताल मनकक्ष के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार के मुताबिक कई लोग देर रात तक मोबाइल, लैपटॉप, टीवी देखते हैं, इससे शरीर की जैविक घड़ी तंत्र प्रभावित होता है। नींद का समय बदल जाता है जो स्लीप डिस्टरबेंस की वजह बनता है। जो धीरे-धीरे मानसिक तनाव में तब्दील होने लगता है। चिड़चिड़ापन, आक्रामकता, व्यवहार में बदलाव, ध्यान देने में परेशानी, दिमाग में भारीपन समेत अन्य समस्या पनपने लगती है। बताया कि युवाओं और कामकाजी लोगों में समस्या तेजी से बढ़ रही है। टेलीमानस नंबर पर कॉल कर निजात का सुझाव मांगते हैं।
डॉ. आशीष ने कहा कि पर्याप्त और अच्छी नींद शरीर और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। लगातार नींद की कमी से सिरदर्द और अन्य शारीरिक समस्याओं के साथ हृदय रोग की आशंका रहती है। क्योंकि नींद पूरी न होने से शरीर में रक्त संचार भी प्रभावित होने लगता है।
नियमित दिनचर्या बनाएं, रील्स की रेल न चलाएं
डॉ. आशीष के मुताबिक बेहतर नींद के लिए नियमित समय पर सोने और जागने की आदत डालें। सोने से पहले मोबाइल स्क्रीन का इस्तेमाल, कैफीन वाले पेय पदार्थ का प्रयोग कम करें। रोज कुछ देर योग या हल्का व्यायाम करें। अगर समस्या लंबे समय बनी रहे तो विशेषज्ञ से परामर्श लेकर ही दवा का सेवन करें। बताया कि जैविक घड़ी तंत्र प्रभावित होने का दुष्प्रभाव लंबे समय रहें तो स्थिति गंभीर होने की आशंका रहती है।