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तैरना सिखाने के लिए नहीं, डूबते को बचाने के लिए है व्यवस्था

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बरेली। तैराकी सीखने या अपने तैराकी के हुनर को और निखारने के लिए स्पोर्ट्स स्टेडियम के स्वीमिंग पूल में प्रैक्टिस करने की सोच रहे हैं तो जरा सावधान रहें। यहां के दोनों स्वीमिंग पूल में खतरा है। पहले तो यहां फिलहाल एक छोटा ही स्वीमिंग पूल चालू है, जिसमें कई-कई दिनों तक पानी ही नहीं बदला जाता। जाहिर है कि यहां आप संक्रमण के शिकार हो सकते हैं। दूसरा बड़ा स्वीमिंग पूल जिसे दो दिन बाद चालू करने की तैयारी है, उसकी हालत और भी ज्यादा खराब है। फर्श की टाइल्स इतनी बुरी तरह उखड़ चुकी हैं कि यह जब भी चालू होगा, तैराकों के जरा सी असावधानी से घायल होने का खतरा बना रहेगा। सबसे बड़ी बात यह कि स्टेडियम में तैराकी सिखाने के लिए कोई कोच भी नहीं है, लिहाजा तैराकी सीखने की चाहत भी ज्यादा पूरी होने वाली नहीं है। लाइफ सेवर जरूर है लिहाजा इतने निश्चिंत आप रह सकते हैं कि आपके साथ यहां कोई बड़ा हादसा नहीं होगा।
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मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने यहां जायजा लिया तो हाल काफी खराब नजर आया। छोटे स्वीमिंग पूल में तैराकी सीखने के लिए यहां पहुंचे बच्चे भी टाइम पास करते दिखे। सीबीएसई स्कूलों की नेशनल तैराकी प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुकीं अनुष्का ने बताया कि उन्होंने यह मुकाम अल्मा मातेर स्कूल में बने स्वीमिंग पूल में स्कूल के ही कोच की देखरेख में तैराकी सीखकर हासिल किया है। आगे की पढ़ाई के लिए वह अब दिल्ली जा रही हैं। तैराकी में और सीखना चाहती हैं। स्कूल में सीखी तैराकी की प्रैक्टिस आदत में रहे इसलिए अपनी मां के साथ स्पोर्ट्स स्टेडियम में आई थीं लेकिन यहां कोई सुविधा ही नहीं है। अनुष्का ने स्वीमिंग पूल किसी तरह आधाअधूरा अभ्यास तो किया लेकिन वहां की कमियाें पर काफी असंतुष्ट दिखाई दीं। बोलीं- पूल में पानी कम भरा गया है जो ठीक से साफ भी नहीं है। फर्श पर इतनी काई जमी है कि खड़े होने का मन ही नहीं कर रहा था। डाइविंग ब्लॉक्स भी नहीं हैं। पूल में बनी सीढ़ियां भी डिस्टर्ब कर रहीं थीं। स्वीमिंग पूल में उतरे और कई छोटे बच्चे पानी से खेलते दिखे। उन्हें तैराकी सिखाने वाला कोई था ही नहीं।

प्रैक्टिस ही नहीं मिलेगी तो परफॉर्म कैसे करेंगे
अंडर 17 जूनियर स्टेट खेल चुके यशराज ने बताया कि वह छह सालों से तैराकी सीख रहे हैं। छह साल पहले स्टेडियम में राकेश यादव कोच थे। उनके समय में शहर के काफी लड़के-लड़कियों ने तैरना सीखा। उस समय स्टेडियम का बड़ा तरणताल खुलता था। राज्य और नेशनल स्तर तक के तैराक यहां पैदा हुए लेकिन राकेश यादव के यहां से जाने के बाद सारी व्यवस्थाएं गड़बड़ होती गईं। अब बड़ा तरणताल तीन-चार साल से बंद पड़ा है। कोच के न होने से बच्चेे तैराकी में आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। कुछ सीनियर बच्चों से ही छोटे बच्चे थोड़ा बहुत सीख लेते हैं। उसका कहना था कि 18 मई से राज्य स्तर की सब जूनियर प्रतियोगिता शुुरू हो रही है। जिले के बच्चों के लिए कई माह पहले से बड़े पूल में अभ्यास होने चाहिए थे। बिना अभ्यास जिले के बच्चे कैसे सफलता प्राप्त करेंगे यह प्रतियोगिता के बाद ही पता लग सकेगा।
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तीन दिन बाद स्टेट टूर्नामेंट, हालत फिलहाल यह..
स्पोर्ट्स स्टेडियम का बड़ा स्वीमिंग पूल कई सालों से सूखा पड़ा है। उसके फर्श पर लगी टायल्स भी उखड़ने लगी हैं। धूप की वजह से फर्श कई जगह चटक गया है। इस स्वीमिंग पूल का यह हाल तब है जब यहां 18 मई से तीन दिवसीय यहां राज्य स्तरीय सब जूनियर और जूनियर प्रतियोगिताएं होने वाली हैं।
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