बरेली। राजनीतिक दलों की ऋण माफी की घोषणा बैंकों पर फिलहाल भारी पड़ रही हैं। किसान क्रेडिट कार्ड पर लिए गए कर्ज की वापसी ऋण माफी की उम्मीद में किसानों ने वित्तीय वर्ष की समाप्ति यानी 31 मार्च तक नहीं की। इससे बैंकों के 2800 करोड़ रुपये ढाई लाख किसानों पर फंस गए हैं। ऋण की अदायगी समय पर न होने से बैंकों का एनपीए बढ़ रहा है और हर साल होने वाले प्रॉफिट में कमी आने लगी है। इस बार समय से केसीसी न चुकाने वाले किसानों को केसीसी पर हर छमाही ब्याज पर मिलने वाली 3.0 प्रतिशत छूट भी नहीं मिल पाएगी।
बरेली में विभिन्न बैंकों की 428 से ज्यादा शाखाओं से 2.5 लाख किसानों को क्रेडिट कार्ड पर 31 दिसंबर 2018 तक 2800 करोड़ से अधिक का लोन दिया गया है। किसान क्रेडिट कार्ड पर मिलने वाले कर्ज को किसानों को हर छमाही लौटाना पड़ता है। जब किसान खरीफ का कर्ज वापस करते हैं तो बैंक उनको रबी सीजन के लिए कर्ज देता है। किसानों को हर साल वित्तीय वर्ष के समापन यानी 31 मार्च से पहले केसीसी ऋण की अदायगी करनी होती है। बैंकों ने 31 मार्च तक केसीसी लोन अदायगी करने वाले किसानों को निर्धारित ब्याज दर 7.0 प्रतिशत में 3.0 प्रतिशत छूट देने का प्रावधान किया है। 31 मार्च बीतने के बाद अगर किसान केसीसी का लोन चुकाते हैं तो उनसे बैंक 7.0 फीसदी ब्याज वसूलते हैं। बरेली के ढाई लाख किसान 2800 करोड़ रुपये के केसीसी लोन पर हर साल 196 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में अदा करने पड़ते हैं।
इस बार किसानों ने अपने अधिकांश केसीसी लोन का बकाया वित्तीय वर्ष की समाप्ति यानी निर्धारित 31 मार्च तक नहीं अदा किया है। हालांकि किसानों को अब केसीसी लोन पर पूरा 7.0 प्रतिशत लोन चुकाना पड़ेगा। बैंक सूत्रों की मानें तो इसके पीछे राजनीतिक दलों की किसानों की ऋण माफी या अन्य तरह की घोषणाएं हैं। बकाया न चुकाने वाले किसानों के ऋण सरकार माफ कर चुकी है, जिन किसानों ने बकाया समय पर अदा कर दिया, उनके लोन माफ नहीं हुए। इसलिए किसान अब केसीसी के लोन समय पर नहीं चुका रहे, जिसके चलते बैंकों की लोन वसूली काफी कम हो गई है। एनपीए बढ़ रहा है। मगर अब इसमें कुछ किया नहीं जा सकता।
ऋण माफी होने से किसान क्रेडिट कार्ड पर दिए जाने वाले लोन की वसूली कम है। बैंकों का एनपीए बढ़ रहा है। ऋण की वापसी समय पर न होने से बैंकों को हर साल होने वाले लाभ में कमी आ रही है। इससे बैंक उद्योग, व्यापार या अन्य सेक्टर को उतनी मात्रा में लोन नहीं दे पा रहे, जितनी मात्रा में देना चाहिए।
- राष्ट्रीयकृत बैंक अफसर