बरेली। दिन-मंगलवार। वक्त-अपराह्न-1.30 बजे। स्थान-तहसील सदर का एक कमरा। इसमें आधा दर्जन से ज्यादा कंप्यूटरों पर कर्मचारी नई मतदाता सूची में बढ़ने वाले वोटों की डाटा फीडिंग करने में लगे हैं। मगर, जब भी कोई व्यक्ति अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने या पुरानी मतदाता सूची में अपना नाम या पता संशोधित कराने के लिए पहुंचता है तो कर्मचारी अक्सर यहां आने वालों से झल्ला उठते हैं।
न ही आवेदकों को ठीक से वोट बनने की जानकारी दी जाती है और न उनको यह बताया जाता है कि उनका वोट बन गया या नहीं। जिन आवेदकों ने दो या तीन महीने पहले ऑनलाइन आवेदन कर दिया है, वह भी इधर-उधर भटकते रहते हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत रिटायर्ड बुजुर्गोँ और महिलाओं को हो रही है। कभी-कभी तो फार्म नंबर छह या आठ देने से ही मना कर देते हैं। ऐसे में नए वोट बनवाने के इच्छुक लोगों को मन मायूस करके वापस लौटना पड़ता है। प्रशासन की ओर से नामांकन के बाद नए वोट बनवाने के लिए लगाए गए कर्मचारी बेहद लापरवाही से काम कर रहे हैं। नए वोट बनवाने की बात करने पर वह झल्ला उठते हैं। शिकायत करने पर अफसर भी नहीं सुनते। वोट बनवाने के लिए आने वाले आवेदकों ने बताया कि उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज न करके वोट डालने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।