फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘जेहाद और माओवाद का गठजोड़ देश के लिए खतरा’

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। भविष्य में देश के लिए सबसे बड़ा बाहरी खतरा जेहाद और माओवाद का गठजोड़ है। वहीं, देश के अंदर की बात करें तो देशद्रोही हैं। बाहरी दुश्मनों से रक्षा के लिए सेना पूरी तरह सक्षम है लेकिन भितरघात कर रहे देशद्रोहियों के खिलाफ ‘इंटर्नल सर्जिक ल स्ट्राइक’ करनी होगी। यह स्ट्राइक सेना या नेता नहीं करेंगे बल्कि समाज को करनी होगी।’ पूर्व रॉ अधिकारी कर्नल आरएसएन सिंह ने ये बातें सिविल लाइंस स्थित आईएमए हॉल में विजन रुहेलखंड की ओर से आयोजित ‘कड़वा सच चुनौतियां 70 साल की’ कार्यक्रम में कहीं।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि ज्यूडिशियरी सिस्टम को देशद्रोहियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने होंगे। तभी ये सर्जिकल स्ट्राइक प्रभावी होगी। अगर ये नहीं हुआ तो आगामी समय में पानीपत जैसाही चौथा युद्ध होने की आशंका है। कहा, रामायण, महाभारत आदि पर सीरियल्स बने हैं। जिसे सभी ने देखा है उसमें क्या कहा है यह सुना है। लेकिन इस्लाम में क्या है यह ‘फतवे’ से पता चलता है। उन्होंने इस्लाम धर्म संबंधित सीरियल्स बनाए जाने की जरूरत बताई। ताकि उसमें लिखी बातों को आसानी से सुना और समझा जा सके। ताकि लोग गुमराह न हों। उन्होंने पुलवामा हमले के बाद किए गए सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाने वाले लोगों को देशद्रोही बताया है। कहा कि 2004 से 2013 के मध्य देश को बांटने वालों की तादाद बढ़ी। जो अब काफी हद तक कम हुई लेकिन वह बढ़ सकते हैं, जिसका खात्मा समाज कर सकता है।

बालाकोट का बरेली से जुड़ाव
पूर्व रॉ अधिकारी ने बताया कि बरेली निवासी सैय्यद अहमद बरेलवी गैर मुस्लिम लोगों से बेहद नफरत करते थे। इसकी वजह से वह मुस्लिम बाहुल्य इलाका पेशावर (वर्तमान में पाकिस्तान स्थित) चले गए थे। वहां उन्होंने बालाकोट में ‘मुजाहिद्दीन मूवमेंट’ संचालित करने के लिए बालाकोट को चुना था। आखिर में वहीं उनका इंतकाल हुआ। बाद में पाकिस्तान बना तो इस स्थान पर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने का ट्रेनिंग सेंटर बना। इसे अब भारतीय सेना ने ध्वस्त कर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें