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फॉरेंसिक जांच में दांतों से पता चलती है मृतक की उम्र

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बरेली। शायद आपको यह जानक र हैरानी होगी कि दांत भोजन की पाचन क्रिया में सहायक होने के साथ ही फॉरेंसिक जांच में भी अहम भूमिका निभाते हैं। प्लेन क्रैश, प्राकृतिक आपदा, क्षत-विक्षत शव समेत वर्षों पुराने शवों की पहचान में दांत बेहद कारगर साबित होते हैं। दांत को देखकर मृतक की उम्र का अंदाजा लगाया जाता है। ‘नेशनल डेंस्टिस्ट डे’ पर यह जानकारी दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. अनूप आर्या ने दी।
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उन्होंने बताया कि यदि मृतक के दांत साफ होते हैं तो उसकी मौत किस तरह से होगी, इसका भी आंशिक अंदाज लग सकता है, लेकिन वर्तमान में लोग गुटखा, तंबाकू, सिगरेट समेत अन्य दांतों को दूषित करने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, जिससे उनके दांत समय से पहले ही उम्र से ज्यादा के हो जाते हैं। बताया कि पहले सौ वर्ष तक के व्यक्ति में भी दांत सही होते थे, लेकिन खान-पान की वजह से वह अब जल्दी ही टूटने अथवा उनका क्षरण होने लगा है। कहा कि दांतों के गंदेपन से न सिर्फ मुंह की बीमारियां बल्कि इंफेक्शन हो गया तो यह हाई बीपी, हार्ट अटैक समेत मधुमेह की बड़ी वजह बन सकता है। बताया कि दांतों के जड़ों में सड़न से ‘एपिकल पीरियडोंटाइटिस’ की बीमारी होती है। 62 वर्ष से अधिक उम्र के लोग इस बीमारी के सर्वाधिक शिकार होते हैं।

दांतों से शुरू होती है दिल की बीमारी
जिला अस्पताल के दंत चिकित्सक डॉ. अवधेश ने बताया कि दांत की जड़ों के ऊपरी भाग में होने वाले संक्रमण से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। संक्रमण सामान्य और लक्षण रहित होने से इसे पहचानना मुश्किल होता है। धीरे-धीरे यह घातक रोग बन जाता है। दांत संबंधी दिक्कत होने पर अगर समय से इलाज न हो तब ‘एक्यूट कोरेनरी सिंड्रोम’ का खतरा रहता है, जिसमें दिल में खून का बहाव अचानक कम या रुक जाने की समस्या होने लगती है, जिसे रोकने के लिए रूट कैनाल किया जाना एकमात्र विकल्प है।
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एक्यूट कोरेनरी सिंड्रोम के लक्षण
- लाल मसूड़े, सूजन और छूने में दर्द होना
- मसूड़ों में खाते, ब्रश करते समय खून आना
- दांतों और मसूड़ों में पस (मवाद) भरना
- मुंह से बदबू और कसैला स्वाद का एहसास
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