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पुष्य नक्षत्र और त्रियोग के साथ माघ पूर्णिमा का संयोग

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बरेली। कलियुग की शुरुआत का दिन माघ मास की पूर्णिमा अबकी बार शुभ संयोगों के साथ दस्तक दे रही है। 19 फरवरी को माघ पूर्णिमा नक्षत्रों के राजा पुष्य नक्षत्र के खास संयोग में बन रही है। इस मुहूर्त में किया गया दान चिरस्थायी होता है। लोकविचार के अनुसार इस संयोग में नदी व सरोवर में स्नान करने से क्षीर सागर के समतुल्य फल प्राप्त होता है। माघ मास सूर्यदेव और विष्णु भगवान को समर्पित होता है।
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ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा ने बताया कि माघ पूर्णिमा पुष्य नक्षत्र में मनेगी। माघ मास में जप/तप से भगवान विष्णु अधिक प्रसन्न होते हैं। इस तिथि पर तिल, गुड़ व कंबल का विशेष महत्व है। इस तिथि पर दान/पुण्य से नरक लोक से मुक्ति मिलने की बात शास्त्रों में कही गई है। बताया कि ब्रह्म वैवर्त्य पुराण के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद दान करने से ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। इस दिन देवता पृथ्वी पर निवास करते हैं। हिन्दू पंचांग के मुताबिक ग्यारहवें महीने यानी माघ में स्नान, दान, धर्म/कर्म का विशेष महत्व है। इस दिन को ‘पुण्य योग’ भी कहते हैं। क्योंकि इस मास में भगवान फकीरों के वेश में रहते हैं। उनकी सेवा जब हृदय से जुड़ती है तो प्रार्थना बन जाती है। यह प्रार्थना ईश्वर को सबसे अधिक प्रिय मानी गई है।

तीन योगों का होगा संयोग
ज्योतिषाचार्य पं. अनुराग शंखधार के मुताबिक माघ माह ग्रह और गोचरों की स्थिति के अनुसार कई शुभ योगों का संयोग बना है। इसमें रूचक योग, बुधादित्य योग और कर्मजीव शामिल हैं। बताया कि चंद्रमा के केंद्र में मंगल उच्च या अपनी राशि में हो तो रूचक योग बनता है। चंद्रमा से दशम भाव में मंगल के रहने से कर्मजीव योग और सूर्य व चंद्रमा के साथ रहने पर बुधादित्य योग बनेगा। तीनों योग मानव मंगल कारक माने गए हैं।
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