डाक विभाग लोगो::
एक करोड़ के गबन की जांच में ढिलाई
पीएमजी कार्यालय की भूमिका भी संदिग्ध, घोटालेबाज पकड़ से बाहर
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। डाक विभाग में एक करोड़ से ज्यादा रकम का गबन करने वाले घोटालेबाज अभी तक पकड़ से बाहर हैं। गबन की जांच करने के लिए बनाई गई चार सदस्यीय समिति कागजों पर घोड़े दौड़ा रही है। कोई यह तक बताने की स्थिति में नहीं है कि गबन आखिर हुआ कैसे। पीएमजी कार्यालय की भूमिका भी इस मामले में संदिग्ध बनी हुई है। कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान तक जारी नहीं किया गया है।
मुख्य डाकघर में हुआ एक करोड़ रुपये से ज्यादा धनराशि के गबन के खुलासे के बाद पोस्ट मास्टर जनरल कार्यालय की सुस्ती बरकरार है। पूरा सप्ताह बीतने के बाद भी जांच समिति किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुुंची है। गबन में शामिल उप पोस्टमास्टर वाईके शर्मा को सस्पेंड किया जा चुका है। जांच समिति की रिपोर्ट आने से पहले ही खजांची उमेश बाबू और लेखा सहायक नवनीत कौर को भी निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई पर चर्चा बनी हुई है। बताया जाता है कि इस घोटाले में शामिल कुछ लोगों को बचाने की कोशिश चल रही है। इसी के चलते गबन के मुख्य आरोपी वाईके शर्मा पर प्रभावी शिकंजा नहीं कसा गया। विभाग ने शर्मा को पोस्टल कालोनी चौपुला में आवास आवंटन किया हुआ है। विभाग ने जांच के नाम पर इतना समय दे दिया कि शर्मा के पैरोकारों ने पुलिस में सेटिंग कर ली है।
अवकाश के दिन जांच
मुख्य डाकघर में चार सदस्यीय जांच समिति ने शनिवार को अवकाश में भी जांच जारी रखी। डाक निदेशालय और मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल कार्यालय ने नए तरीके से हुए घोटाले को गंभीरता से लिया है, इससे परेशान पीएमजी आरकेबी सिंह ने सोमवार तक जांच रिपोर्ट मांगी है।