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Bareilly News: दो माह में 12 प्रतिशत गेहूं की खरीद

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- लक्ष्य 1.80 लाख एमटी खरीद का, अब तक हुई 22,642 मीट्रिक टन
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- खरीद केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे उम्मीद के मुताबिक किसान

संवाद न्यूज एजेंसी

बरेली। गेहूं खरीद के मामले में तमाम कोशिशों के बाद भी किसान केंद्रों तक नहीं पहुंच रहे हैं। यही कारण है कि दो महीने बाद भी अभी तक महज 12 प्रतिशत गेहूं यानी 22,642 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो सकी है। ऐसे में इस बार भी गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा होने की संभावना बहुत कम है।



शासन से गेहूं खरीद के लिए 1.80 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य जिले को दिया गया है। खरीद के लिए जिले में 137 केंद्र खोले गए हैं। खरीद एक मार्च से शुरू हो गई है, जो कि 15 जून तक चलेगी। अभी तक की खरीद की बात करें तो 22,642 मीट्रिक टन गेहूं ही खरीदा जा सका है। सरकार की तरफ से 2275 रुपये प्रति क्विंटल का मूल्य किसानों को दिया जा रहा है। बावजूद इसके किसान केंद्र पर नहीं पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा खरीद खाद्य विभाग के केंद्रों पर 12,567 मीट्रिक टन हुई। जबकि अब तक सबसे कम खरीद मंडी समिति में 475 मीट्रिक टन हुई। गेहूं खरीद को बढ़ाने के लिए अधिकारियों का देहात पर जोर है।
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फरीदपुर : केंद्रों पर सन्नाटा
कस्बे में दो खरीद केंद्र खोले गए हैं। केंद्रों पर किसानों के बैठने, पानी आदि की सारी सुविधाएं हैं। प्रथम केंद्र पर पांच हजार व द्वितीय पर चार हजार क्विंटल गेहूं अब तक खरीदने का दावा किया जा रहा है। जब केंद्रों की मौके पर जाकर पड़ताल की गई तो पता चला कि किसान केंद्र पर आ ही नहीं रहे हैं। एक-दो किसान ही केंद्र पर गेहूं लेकर पहुंच रहे हैं। सोमवार को प्रथम केंद्र पर खरीद शून्य रही, जबकि मंगलवार को एक किसान 110 क्विंटल गेहूं लेकर आया। वहीं, द्वितीय केंद्र पर मंगलवार को 50 जबकि सोमवार को 43 क्विंटल गेहूं की खरीद हो सकी। दिन भर केंद्र प्रभारी खाली बैठे रहते हैं।
सरकार से ज्यादा दाम दे रहे व्यापारी
हर बार की तरह खरीद पर इस बार भी व्यापारी हावी है। सरकारी दाम 2275 का है। वो भी तब जब केंद्र पर लाकर बेचेगा। केंद्र पर दाना गीला होने, छलने आदि की परेशानियों का सामना किसान को करना पड़ता है। साथ ही रकम भी नकद नहीं मिलती। वहीं, व्यापारी खेत से सीधे फसल खरीद ले रहे हैं। ऐसे में व्यापारी अगर सरकारी दाम से दस रुपये क्विंटल कम भी देता है तो किसानों को फायदा होता है। वजह यह है कि केंद्र तक गेहूं को लाने में ट्रैक्टर ट्राली के डीजल, मजदूरी, छलना आदि का खर्चा बच जाता है। साथ ही रकम नकद मिलती है। यही कारण है कि किसान सरकारी केंद्रों पर नहीं जा रहा है।
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डिप्टी आरएमओ कमलेश कुमार ने बताया कि सेंटरों पर किसानों के लिए सुविधाएं मौजूद हैं। किसानों के घरों पर जाकर बातचीत कर गेहूं की खरीद की जा रही है। पिछले साल 1.9 प्रतिशत ही खरीद हो सकी थी। इस साल तो अभी तक 12 प्रतिशत खरीद हो चुकी है।
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