बरेली। उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की आखिरी मंडलीय गोष्ठी में अफसरों को किसान तो ढूंढे नहीं मिले। किसानों के नाम पर जो मिल गए, उनको गोष्ठी में बुला लाए। फिर भी बरेली-शाहजहांपुर, बदायूं और पीलीभीत के चारो जिलों से 100 किसान भी नहीं जुटे। चंद किसानों को स्प्ऱिंकलर सिंचाई पद्धति समझाने के लिए बुलाई गई गोष्ठी के नाम पर दो लाख का बजट ठिकाने लगाने लग गया। गोष्ठी के बाद साहब ने तो होटल से स्पेशल थाली में पनीर मंगवाकर वीआईपी खाना खाया और किसानों को बंद डिब्बे में वही सूखी पूड़ी सब्जी मिली। किसान वह डिब्बा लेकर अपने घर चले गए। पॉलीहाउस खोलकर किसान बने सेठ मंच पर सम्मानित हो गए।
डीडीपुरम पार्क में बुधवार को उद्यान विभाग की मंडलीय गोष्ठी सुबह 10 बजे से होनी थी। मगर, किसान न जुट पाने की वजह से यह एक बजे प्रारंभ हो पायी। गोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने फीता काटकर किया। उन्होंने स्टालों का भ्रमण कर किसानों की उपलब्ध ड्रिप, स्प्रिंकलर, रेनगन आदि देखी। कमिश्नर गन्ना, कृषि, मत्स्य, पशुपालन, हर्बल और नर्सरी के स्टालों पर भी गए। गोष्ठी में सब कुछ था, लेकिन जिनके लिए गोष्ठी आयोजित की गई थी, वही किसान नदारद थे। कमिश्नर ने एक दर्जन से ज्यादा प्रगतिशील किसानों को पॉली हाउस बनाकर सब्जी और फूलों की खेती करने के लिए सम्मानित भी किया। हालांकि विभाग द्वारा सम्मानित कराए जाने वालों में किसान कम, सेठ ज्यादा थे। दो दिवसीय गोष्ठी के पहले दिन कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फूल और सब्जी की खेती के बारे में बताया। गोष्ठी में उप निदेशक उद्यान मनोहर सिंह के अलावा डीएचओ बरेली डा. पूजा आदि मौजूद थीं। संचालन उद्यान अधिकारी बदायूं रामनारायण वर्मा ने किया।
स्प्रिंकलर को मिशन के तौर पर लें अफसर
कमिश्नर ने इस मौके पर कहा कि स्प्रिंकलर सिंचाई से हम विभिन्न फसलों में पानी की 70 से 90 फीसदी तक की बचत कर सकते हैं। मगर, मंडल में केवल 800 हेक्टेयर और बरेली में केवल 200 हेक्टेयर खेती में स्प्रिंकलर या डिप पद्धति ही अपनाई जा रही है। उद्यान विभाग के अफसर इसे मिशन के तौर पर लेकर आगे बढ़ाएं और किसानों को स्प्रिंकलर सिंचाई के लिए प्रेरित करें। इससे न केवल उत्पादन में बढ़ोत्तरी होगी, बल्कि आर्गेनिक खेती में उसका मूल्य भी कई गुना ज्यादा मिलेगा। कमिश्नर ने कहा कि अब परंपरागत खेती धान, गेहूं या गन्ने से आगे निकलकर किसान अपनी टोकरी में ज्यादा फसलों का विकल्प रखें। तभी वह अपनी आमदनी बढ़ा पाएंगे। उन्होंने बताया कि सरकार कांट्रेक्ट खेती पर भी नियम बना रही है। लीज या कांट्रेक्ट पर खेती करने के लिए बड़ी कंपनियां खेती से जुड़ रही हैं।
बंद पैकेट में पूड़ी सब्जी थीं, वही खाईं
फरीदपुर कस्बे की भाग्यवती का कहना था कि उनके पास एक बीघा भी जमीन नहीं है। वह तो दूसरी जगह काम करके परिवार चलाती हैं। उनसे कोई कहने गया था कि बरेली चलो। तुमको पैसे मिलेंगे। तभी वह आईं। इनके साथ फरीदपुर के एक ही मोहल्ले की रुक्मा, रेणुका तारावती आदि ने भी बताया कि उनके पास जमीन नहीं है। नर्सरी वालों ने कहा कि चलो, तुमको खाना भी मिलेगा और पैसे भी। इसलिए चले आए। मगर, यहां नाश्ते में दो रुपये वाला बिस्किुट-चाय और बंद डिब्बे में पूड़ी सब्जी ही मिली। वह भी सूखी हुई। बहेड़ी के सीताराम, धनीराम ने भी बताया कि उनको गोष्ठी खत्म होने के बाद खाने का पैकेट दिया गया, जिसमें पूड़ी और मटर टमाटर की सब्जी थी।