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एक साल में एडीजी ने काम से बनाई पहचान

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बरेली। एडीजी प्रेमप्रकाश का बरेली जोन में एक साल का कार्यकाल उल्लेखनीय रहा। बेहतर काम के अलावा सामाजिक सरोकारों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना उनकी खासियत रही। सुबह से दोपहर बाद तक उनके दफ्तर में फरियादियों की भीड़ रहती थी।
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कानपुर जोन के नए एडीजी बनाए गए प्रेमप्रकाश ने दो फरवरी 2018 को बरेली जोन का प्रभार लिया था। इस दौरान कई पर्वों और सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ने जैसे मौके आए जहां उनकी सूझबूझ से हालात सही हो गए। यही वजह रही कि मोहर्रम के बाद एडीजी और बरेली पुलिस को लखनऊ बुलाकर डीजीपी ने सम्मानित किया। पीड़ित की रिपोर्ट दर्ज कराना, टहलते हुए घटनास्थल पर पहुंच जाना और पैदल ही पुलिस पिकेट को चेक कर लेना उनकी प्राथमिकता रही। उनके समय में अहलादपुर समेत करीब 23 मुठभेड़ हुईं, हालांकि कुछ मुठभेड़ अभी सवालों में है। विभागीय अधीनस्थों से लेकर जनता तक को उनके अचानक ट्रांसफर से झटका लगा है। डिप्टी सीएम के दौरे के वक्त उन्हें लेकर कुछ विधायकों की नाराजगी की चर्चा भी रही, हालांकि खुलकर किसी जनप्रतिनिधि ने इस बात को स्वीकार नहीं किया।

डीआईजी ने 22 दरोगा किए दूसरे जिलों में ट्रांसफर
बरेली। डीआईजी राजेश कुमार पांडेय ने बरेली रेंज में देर रात 22 दरोगाओं के तबादले कर दिए। इन्हें रेंज के ही दूसरे जिलों में तैनाती दी गई है और तत्काल रिलीव करने के आदेश दिए हैं। चुनाव आयोग के निर्देश पर ये कार्रवाई हुई है।
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200 से अधिक सिपाहियों के तबादले
बरेली। डीजीपी स्तर से 2015 सिपाहियों को दूसरी जोन में तबादले पर भेजा गया है। इसकी सूची जारी कर दी गई है। बरेली जोन के करीब दो सौ से ज्यादा सिपाही इन तबादलों से प्रभावित हुए हैं। एडीजी के स्टाफ ऑफिसर ओपी यादव ने बताया कि संबंधित सूची में शामिल सिपाहियों की रिलीविंग की जा रही है।
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