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कैसे बचाएं मुल्क के अम्न-ओ-अमान को, कुछ लोग मेरे देश में गद्दार हो गए

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तिलहर। नगर के मोहल्ला घेरचौवा स्थित गुलशन जहां खैरपुरी के आवास पर मुशायरे का आयोजन किया गया। इस मौके पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। देर रात तक चले मुशायरे में शायरों ने समां बांध दिया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ रईसमन तिलहरी ने कलाम पेश किया- कैसे बचाएं मुल्क के अम्न-ओ-अमान को, कुछ लोग मेरे देश में गद्दार हो गए। रईस तिलहरी ने पक्तियां पेश की, तुझको जवाब देने की ताकत तो थी मगर, मजबूरियों के सामने मुरदार हो गए। ओम प्रकाश साहू ने कलाम - कुरबां हुए वतन की हिफाजत के वास्ते, सारे शहीद कर्ज से उद्धार हो गए। शमशाद आतिफ ने सुनाया- कुछ वे जमीर लोग जो जरदार हो गए, सर के बगैर साहिबे दस्तार हो गए। शकील तिलहरी ने सुनाया- मेरा ही खून पीने को तैयार हो गए, नादान दोस्त कितने समझदार हो गए। सुल्तान दर्द ने कलाम- फिर शहरे नामुराद में हलचल सी मच गई, हम क्या जरा सा दोस्तों बीमार हो गए। गुलशन जहां खैरपुरी ने फरमाया- कल तक जो बसर करते थे सड़कों पे जिंदगी, मौका मिला तो महलों के हकदार हो गए।
इसके अलावा मौलाना सखावत हुसैन आरजू, शायर बहीद तिलहरी, अकरम तिलहरी, फैजान तिलहरी, शोएब तिलहरी आदि ने भी कलाम पेश किए। कार्यक्रम में बशीरुद्दीन उर्फ आमिर मियां, मोहम्मद आकिब अंसारी, चीनी मिल के डायरेक्टर साजिद अली खां, मास्टर शाहिद अली, हुमाम अंसारी, मास्टर मतलूब आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में दो मिनट का मौन रखकर शहीदाने वतन की आत्मा की शांति के लिए दुआ की।
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