बरेली। नगर निगम के जलकल अनुभाग में मानक पूरे न होने के बावजूद एक फर्म को ट्यूबवेल के ऑटोमेशन का टेंडर दे दिया गया है। दस साल के लिए होने वाले इस टेंडर की राशि दस करोड़ से अधिक है। पूर्व में एक ठेकेदार का टेंडर कैंसिल भी किया जा चुका है। इसको लेकर नगर निगम में घमासान मच गया है। पूर्व ठेकेदार की शिकायत पर मेयर उमेश गौतम ने नगर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव को अपने स्तर से और विजिलेंस जांच कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं इस मामले को लेकर जलकल अफसरों और ठेकेदार के बीच जमकर गाली-गलौज भी हुई।
नगर निगम क्षेत्र के 67 ट्यूबवेल के ऑटोमेशन, संचालन एवं अनुरक्षण के टेंडर में गोलमाल को लेकर मेयर से शिकायत की गई है। रिलाइड सोल्यूशंस फर्म के विवेक गुप्ता ने बताया कि अक्तूबर में यह टेंडर पहली बार निकाले गए थे। पांच लोगों ने आवेदन किया था और काम उन्हें मिल गया। मगर इसके बाद उनका आवेदन निरस्त कर दिया गया और दिसंबर में दोबारा टेंडर निकाल दिया गया। इसमें पांच लोगों ने आवेदन किया, जिनमें से दिल्ली की एक फर्म को मानक पूरे न होने पर बाहर दिया गया। इसके बाद टेक्निकल बिड खोल दी गई, जबकि इसमें शामिल तीन फर्म को ऑटोमेशन का अनुभव नहीं था। नियमानुसार री-टेंडर होने के चाहिए, लेकिन तीनों फर्म को पास करके फाइनेंसियल बिड खोल दी गई और लखनऊ की फर्म को ठेका दे दिया। जबकि उस फर्म के पास काम करने का अनुभव भी नहीं है। इस गड़बड़ी से संबंधित दस्तावेज विवेक गुप्ता ने मेयर के समक्ष पेश किए तो उन्होंने काफी नाराजगी जताई। इसके बाद नगर आयुक्त को मामले की जांच स्वयं या फिर विजिलेंस से कराने के निर्देश दिए हैं।
ठेकेदार और जलकल अफसरों में विवाद
टेंडर के इस गोलमाल को लेकर शुक्रवार दोपहर जलकल अनुभाग में ठेकेदार और अफसरों के बीच जमकर विवाद हुआ। बताया जाता है कि गाली-गलौज के बीच मारपीट तक नौबत पहुंच गई। ऑफिस में मौजूद लोगों और कर्मचारियों ने बीच में पड़कर मामला रफा-दफा कराया। इस बारे में जानकारी के लिए जब जीएम जलकल वीएन द्विवेदी को फोन किया तो उनका फोन नहीं उठा।
दस करोड़ से ज्यादा राशि का है काम
यह टेंडर 67 ट्यूबवेल के लिए किया गया है। प्रत्येक ट्यूबवेल के लिए हर महीने 15 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे और यह टेंडर दस साल के लिए किया गया है। इस हिसाब से ठेका लेने वाली कंपनी पर दस सालों में नगर निगम दस करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च करेगा।
‘जलकल अनुभाग में टेंडर में गड़बड़ी की शिकायत की गई थी। इस मामले में नगर आयुक्त को अपने स्तर से अथवा विजिलेंस से जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। गड़बड़ी या भ्रष्टाचार किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’
- उमेश गौतम, मेयर