बरेली। बड़ा बाईपास भूमि अधिग्रहण मामले में सैकड़ों किसानों को मुआवजा देने से हाथ खड़े करने वाले एनएचएआई अफसरों को घेरने की तैयारी चल रही है। दो विधायकों की पैरवी के बाद शासन ने जिला प्रशासन से इस प्रकरण की रिपोर्ट मांगी है। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी की तरफ से ब्योरा तैयार किया जा रहा है। शनिवार को डीएम ने इस बाबत किसानों के साथ एक बार फिर से वार्ता की भी की है।
बड़ा बाईपास बनाने के लिए करीब 600 किसानों की ली गई जमीन के मुआवजे का मामला अब तक नहीं सुलझ सका है। मुआवजे की लड़ाई लड़ रहे किसानों की पैरवी के लिए शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार और केसर सिंह ने भी लेटर भेजे थे। इस पर शासन ने इस मामले में डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह से रिपोर्ट मांगी थी। किसानों की तरफ से लड़ाई लड़ रहे अखिल भारतीय किसान महासभा के जिलाध्यक्ष हरिनंदन सिंह का कहना है कि एनएचएआई के अफसरों के मुआवजा के बड़े मामले से यूं मुंह मोड़ लेना ठीक नहीं है। शनिवार को डीएम ने पीड़ित किसानों से बातचीत की। साथ ही इस मामले में शासन को भेजने के लिए तैयार की गई रिपोर्ट के बारे में भी अवगत कराया। डीएम ने किसानों से पूछा कि इस रिपोर्ट को लेकर कोई आपत्ति हो तो अभी बता दें। इसके बाद डीएम ने शासन को फाइनल रिपोर्ट भेजने के आदेश एसएलएओ सुल्तान अशरफ सिद्दीकी को दे दिए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के बाद एनएचएआई के अधिकारियों पर किसानों को मुआवजे मामला निस्तारित करने के लिए काफी दबाव बनेगा।
मुआवजा की आस में स्वर्गवासी हो चुके कई किसान
बड़ा बाईपास भूमि अधिग्रहण में मुआवजा को लेकर असंतुष्ट किसानों में बड़ी संख्या में ऐसे किसान है कि जिनके पास अब नाममात्र की जमीन ही बाकी रही है। मुआवजा न मिलने से गरीबी के हालात में जी रहे हैं। ऐसी हालत में 16-17 किसानों की मौत भी हो चुकी है। डीएम ने अधिग्रहण की जद में आने वाले दो दर्जन गांवों के किसानों का सर्वे कराने के लिए 29 लेखपाल लगाए हैं। इनके माध्यम से यह रिपोर्ट तैयार होगी कि अधिग्रहण के बाद किस किसान के पास अब कितनी जमीन बाकी रह गई है।
‘बड़ा बाईपास मामले को लेकर शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है। किसानों को भी इस रिपोर्ट से अवगत करा दिया गया है, ताकि इसे लेकर बाद में उन्हें किसी तरह की आपत्ति न रहे।’
- वीरेंद्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी