बरेली। अवैध निर्माण के मामले हों या फिर रिहायशी इलाके में बार खुलवाने के, हाल ही में शहर के पूंजीपतियों के नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले ऐसे कामों को सरकारी महकमों में साधने की वजह से चर्चा में बने ‘नेता जी’ की चौखट से रविवार को एक अनाथ बेटी को आंखों में आंसू लेकर मायूस लौटना पड़ा। बचपन से ही अनाथालय में पली-बढ़ी कविता आधार कार्ड बनवाने के लिए नेता जी का संस्तुति पत्र लेने उनके निवास पर पहुंची थी। नेता जी के कार्यालय सहायक ने उससे उसके पिता का नाम पूछने के साथ उनकी संतान होने का प्रमाण पत्र मांगा तो वह हक्कीबक्की रह गई। कविता के साथ गए उसके ससुराल वालों ने इस पर आपत्ति जताई तो कार्यालय सहायक इतने बिफर गए कि उन्हें अपने दफ्तर से फौरन बाहर निकलने फरमान सुना दिया।
पिछले सप्ताह 11 नवंबर को ही आर्य समाज अनाथालय में पली अनाथ नेपाली बेटी का विवाह सुभाषनगर के सुरेश से हुआ था। शादी में उपहार स्वरूप मिले कैश को जमा करने के लिए बैंक खाता खुलवाने को आधार कार्ड की जरूरत पड़ी। बैंक में बताया गया कि आधार कार्ड के लिए अनाथालय के सर्टिफिकेट, शादी का कार्ड, पति के निवास प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेजों के साथ किसी स्थानीय जनप्रतिनिधि की संस्तुति भी देनी होगी। इसके बाद कविता अपने ससुराल वालों के साथ नेता जी के कार्यालय पहुंची, जहां नेता जी की गैरमौजूदगी में उन्होंने उनके कार्यालय से बात की। कार्यालय सहायक ने संस्तुति पत्र तो दिया नहीं, उल्टे बदसलूकी कर कविता और उसके परिजनों को अपमानित जरूर कर दिया।
कविता के पति सुरेश, जेठ जितेंद्र, ससुर भगवान दास का आरोप है कि उन्होंने अपना प्रार्थना पत्र कार्यालय सहायक को दिया तो उन्होंने पहले तो अनाथ कविता के पिता का नाम पूछ लिया। आरोप है कि पिता का नाम पता होने से इनकार करने पर कार्यालय सहायक कविता से बोले- तुम्हारा तो अस्तित्व ही नहीं है। न आधार बनेगा और न नेता जी संस्त़ुति पत्र लिखेंगे’। इस बदसलूकी का वहां मौजूद आरएसएस के एक पदाधिकारी ने भी विरोध किया तो कार्यालय सहायक ने उनसे भी बहस करते हुए कार्यालय से बाहर निकल जाने को कह दिया।
पहले किया इनकार फिर बोले पिता तो चाहिए
नेता जी के कार्यालय सहायक से बात की गई तो उन्होंने पहले तो कार्यालय में होने से इंकार करते हुए ऐसे किसी मामले की जानकारी न होने की बात कही। बाद में बोले- अनाथ के आधार कार्ड के लिए आवश्यक दस्तावेज तो चाहिए ही। निवास, उम्र, पिता से संबंधित प्रमाण पत्र होने चाहिए, जो नहीं थे, इसीलिए आधार कार्ड के लिए संस्त़ुति नहीं की। बाकी आरोप झूठ हैं।
अनाथालय के बच्चों का अभिभावक नियमानुसार अनाथालय के संचालक होता है। उम्र के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट हो तो आधार कार्ड बन सकता है। शादी हुई है तो इन दस्तावेजों के साथ पति के निवास स्थान, शादी का कार्ड, जनप्रतिनिधि का संस्त़ुति पत्र भी जरूरी है। दस्तावेज होने पर आधार कार्ड बनाया जा सकता है। - सत्येंद्र कुमार, सीडीओ