मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 जुलाई से 50 माइक्रोन से कम की पॉलिथीन बंद करने के आदेश जारी किए थे। कहा था कि इसके बाद 15 अगस्त से प्लास्टिक व थर्माकोल से निर्मित कप, गिलास आदि को बंद कर दो अक्टूबर तक इन पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाएगी। मगर पॉलिथीन विरोधी शासन के अभियान को निगम के अफसरों ने कुछ दिन में ही धराशायी कर दिया।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद 15 जुलाई को रविवार होने के बावजूद नगर निगम ने जोरदार तरीके से पॉलिथीन विरोधी अभियान का आगाज किया था। मगर इसके बाद अभियान की रफ्तार मंद पड़ने लगी और दस दिन बाद ही पॉलिथीन जब्त करने की कार्रवाई बंद हो गई। निगम का तर्क है कि बरसात के चलते उनकी टीम अन्य कार्यों में व्यस्त है, जिसके चलते बाजारों में फिर से पॉलिथीन की बिक्री और प्रयोग धड़ल्ले से होने लगा है।
दर्जन भर विभागों की थी जिम्मेदारी
कार्रवाई सिर्फ नगर निगम ने की
इस अभियान के लिए शासन से जारी अधिसूचना के अनुसार 12 विभागों के अधिकारियों को छापामारी करने का अधिकार दिया गया है। इसमें जिला प्रशासन से डीएम, एडीएम एवं एसडीएम, स्थानीय निकाय, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उपनिदेशक पर्यावरण, सीएमओ एवं चिकित्सा अधीक्षक, जीएसटी अधिकारी, वन विभाग, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार, पर्यटन विभाग, जिला पूर्ति अधिकारी एवं खाद्य निरीक्षक, खाद्य एवं सुरक्षा निरीक्षक, औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अधिकारी शामिल हैं। मगर शहर में नगर निगम के अलावा इनमें से किसी विभाग का कोई भी अधिकारी छापामारी के लिए नहीं निकला।
पॉलिथीन बंद करने को किया जागरूक
बरेली। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल महानगर की ओर से शहर को पॉलिथीन मुक्त और पर्यावरण बचाने के लिए फड़ व्यवसाइयों को जागरूक किया गया। एफएसडीए के अधिकारियों के साथ मिलकर व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों ने पॉलिथीन हटाओ पर्यावरण बचाओ का नारा दिया। इसी क्रम में कुतुबखाना, घंटाघर, कोहाड़ापीर के दुकानदार जिनके पास पॉलिथीन थी उसे लेकर बदले में कपड़े के थैले दिए गए। यहां मुख्य संरक्षक विधायककेसर सिंह, एफएसडीए असिस्टेंट कमिश्नर संजय कुमार पांडे आदि मौजूद रहे।