अमीरुल मोमीनीन हजरत अली की शहादत को याद करते हुए शिया हल्के में गम का माहौल है। लोगों ने रंग बिरंगे कपड़ों को बदलकर काले और सादे कपड़े धारण कर लिए हैं। साथ ही मजलिसों का सिलसिला शुरू हो गया है।
इस कड़ी में मोहल्ला कंघी टोला स्थित इमामबाड़ा महबूब हुसैन में मजलिस को हाजी अलमदार हुसैन ने खिताब किया। उन्होंने कहा कि हजरत अली के जैसा कोई बहादुर इंसान नहीं था, बड़े से बड़ा ताकतवर आपके सामने टिक नहीं पाता था। इस लिए दुश्मन इस्लाम अब्दुल रहमान इब्ने मुलजिम नामक व्यक्ति के जरिए 19 रमजान की सुबह मस्जिदे कूफा में नमाजे फज्र के दौरान आप पर हमला कराया, जिससे आप बुरी तरह जख्मी हो गए और 21 रमजान की सुबह आप इस दुनिया से रुखसत हो गए।
मौला अली की शहादत को सुनकर इमामबाड़े में मौजूद लोग रोने लगे। मजलिस के बाद नौहाख्वानी व सीनाजनी के जरिए खिराजे अकीदत पेश की गई। इस मौके पर समर अब्बास जैदी, नाजिम हुसैन, अख्तर हुसैन, एजाज नकवी, गुलरेज हुसैन, कल्बे हुसैन, मोहम्मद असकरी आदि मौजूद रहे। इसी तरह अन्य इमामबाड़ों में भी देर रात तक मातमी सदाएं बुलंद होती रहीं।
मजलिस व ताबूत की जियारत आज
बरेली। दामादे रसूल व मौलाए कायनात हजरत अली की शहादत पर शिया सामाजिक संस्था कारवाने अदब की ओर से एक मजलिस शुक्रवार को गढै़या स्थित इमामबाड़ा हकीम आगा साहब में रात्रि साढ़े आठ बजे आयोजित की जाएगी। संस्था के मुख्य संयोजक समर अब्बास जैदी के अनुसार इस मजलिस को मौलाना हामिद जैदी लखनवी खिताब करेंगे। मजलिस के बाद ताबूत की जियारत कराई जाएगी।