बरेली। त्रिशूल एयरबेस की पहचान बन चुके फाइटर प्लेन का मॉडल करीब छह दिन पहले हटा लिया गया है। कयास लगाया जा रहा है कि जमीन अधिग्रहण को लेकर मंत्रालय का रुख सकारात्मक न मिलने के चलते ऐसा किया गया है। वहीं अधिकारी इस संबंध में सुरक्षा कारणों का हवाला दे रहे हैं।
बताते हैं कि बालाकोट में आतंकी ठिकाने को ध्वस्त करने के लिए मिराज फाइटर प्लेन ने बरेली के त्रिशूल एयरबेस से ही उड़ान भरी थी। ऐसे में दो माह बाद अचानक फाइटर प्लेन का मॉडल हटाए जाने को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है।
सूत्रों के मुताबिक करीब आठ साल पहले त्रिशूल एयरबेस के बाहर खाली पड़ी जमीन के अधिग्रहण के लिए एयरफोर्स अधिकारियों ने कवायद शुरू की। मामले में संबंधित जमीन के मालिक से बातचीत के बाद प्रस्ताव एयरफोर्स के उच्चाधिकारियों को भेजा गया। अधिग्रहण को लेकर कवायद शुरू होने के बाद खाली पड़ी जमीन पर त्रिशूल एयरबेस की ओर से एयरफोर्स की पहचान के तौर पर एक फाइटर प्लेन का मॉडल लगा दिया गया। दूसरी ओर जमीन अधिग्रहण का मामला चलता रहा। बताते हैं कि पिछले दिनों संबंधित भूमि अधिग्रहण की फाइल रक्षा मंत्रालय पहुंची है, जिसमें मुआवजे के तौर पर अच्छी खासी रकम मांगी गई है। थोड़ी सी जमीन के लिए लाखों रुपये के भुगतान को लेकर पेच फंस गया है। सूत्रों के मुताबिक जमीन अधिग्रहण को लेकर मंत्रालय का रुख सकारात्मक न मिलने पर फि लहाल प्लेन के मॉडल को हटाया गया है। हालांकि जमीन अधिग्रहण का मामला सुलझने की संभावना है, जिसके बाद फाइटर प्लेन फिर एयरबेस की खूबसूरती बढ़ाएगा। संबंधित मामले पर एयरफोर्स अधिकारियों से संपर्क किया गया तो उन्होंने सुरक्षा कारणों के चलते जानकारी देने से इंकार किया है।