बरेली। सेतु निगम के अधिकारी सुरक्षा मानकों पर ध्यान देने को तैयार नहीं हैं। नियम है कि शटरिंग लगाने-हटाने के दौरान पुल के दोनों साइड सेफ्टी नेट लगाया जाए और यातायात को दूर रखा जाए मगर इस पर कोई ध्यान नहीं है। यह हाल तब है जब सुरक्षा मानकों पर पहले भी सवाल खड़े होते रहे हैं। लखनऊ से आई सुरक्षा ऑडिट टीम भी असंतोष जता चुकी है। मुख्य सुरक्षा अभियंता अरविंद देव ने तो इसी पर नाराजगी जताई थी कि पुल के काफी पास ट्रैफिक निकल रहा है। भारी वाहनों के तेज गति से निकलने से पुल का स्ट्रक्चर भी कांप रहा है। यातायात की गति नियंत्रित करने को वो ब्रेकर भी दोबारा नहीं बने जो 20 अप्रैल को प्रधानमंत्री का काफिला निकालने के लिए तोड़े गए थे। पुल के पास रेडियम सिग्नल भी अब तक नहीं लगाए गए हैं।
पहले हो चुके हैं कई हादसे
लालफाटक ओवरब्रिज बनने के बाद से ही सुरक्षा मानकों की अनदेखी से एक के बाद एक हादसे होते रहे हैं। पूर्व डीपीएम नवाब सिंह ने यहां सर्विस लेन बनवाए बगैर काम शुरू करा दिया था। इससे कई हादसों में नौ लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। पिछले महीने हवा में सड़क किनारे रखी लोहे की बोर्ड बैरिकेडिंग के लुढ़क जाने से एक घायल हो गया था।
टूटी सर्विस लेन से भी हादसे की आशंका
पुल की सर्विस लेन के घटिया निर्माण से उसके टूटने और दरकने का सिलसिला जारी हो गया है, जबकि अभी ट्रक काफी कम संख्या में निकल रहे हैं। आगे ट्रैफिक का दबाव बढ़ेगा तो इस रोड टूटने से हादसे का खतरा बना है। लोग इसे लेकर डरे हुए हैं।
स्टाफ से कह दिया गया है कि सुरक्षा मानकों का अनुपालन हो। कहीं कोई लापरवाही बरती गई तो उसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। - वीके सेन, डीपीएम, सेतु निगम