बरेली। शिव मंदिर डिफेंस कॉलोनी में चल रही श्रीशिव महापुराण के आठवें दिन कथाव्यास ने सोमनाथ के बाद अन्य ज्योतिर्लिंगों की कथा सुनाई। बाबा वैद्यनाथ की कथा सुनाते हुए कहा कि एक बार रावण ने कठोर तपस्या कर शिव जी को प्रसन्न कर शिव के लंका में विराजमान होने का वर मांगा। शिव ने शिवलिंग प्रदान कर शर्त रखी कि पृथ्वी पर जहां स्वरूप रखोगे यह वहीं स्थापित हो जाएगी। रास्ते में रावण ने एक ग्वाले को स्वरूप दे दिया, जिसने उसने जमीन पर रख दिया। रावण ने शिवलिंग को उठाने की कोशिश लेकिन असमर्थ रहा। यही शिवलिंग बाद में वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग कहलाया। कथा विश्राम के बाद प्रसाद वितरण हुआ। यहां इंद्रभान सक्सेना, विनय खंडेलवाल, ज्योति, अचल आदि मौजूद रहे।