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माया-अखिलेश की जोड़ी पर चुप्पी तोड़ी पर हिंदुत्व की हवा ने उम्मीद भी तोड़ी

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बरेली। मुसलमानों के सामने इस चुनाव में दो ही विकल्प थे, एक तो कांग्रेस और दूसरा सपा-बसपा का गठबंधन। चुनाव का एलान होते ही दोनों पार्टियों में मुसलमानों की खींचतान शुरू हो गई थी, लेकिन मुसलमान मतदाताओं ने आखिर तक अपनी खामोशी नहीं तोड़ी। ऐन मतदान के दिन मुस्लिम मतदाताओं की भीड़ बरेली और आंवला दोनों सीटों पर सपा-बसपा गठबंधन पर टूटी तो कांग्रेस के साथ भाजपा के भी होश उड़ गए। मगर जल्द ही हिंदू बहुल क्षेत्रों में इसकी प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी। जातिगत दायरों से निकलकर हिंदू वोटर भाजपा के पक्ष में मतदान निकल पड़े। मतदान खत्म होने तक जो रुझान सामने आया, उसने जता दिया कि अंत तक खामोश रहकर अपने इरादे का पता न लगने देने की मुसलमान वोटरों की रणनीति बहुत ज्यादा कारगर साबित नहीं हो पाई।
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मुस्लिम मतदाता इस बार पूरे चुनाव में चुप्पी साधे रहे। यहां तक कि मंगलवार को बूथों पर वोट डालने के बाद भी मुस्लिम मतदाता यह बताने में हिचकिचाते रहे कि उनकी पसंद क्या है। कुछ वोटरों ने मुंह खोला तो उनका एक ही जवाब था कि पांच साल में भाजपा सरकार ने उनके लिए कुछ नहीं किया। उन्हें अखिलेश यादव और मायावती की जोड़ी से ही उम्मीद है। कांग्रेस क्यों नहीं, इस सवाल के जवाब में उनका कहना था कि हाथ के पंजे में भाजपा को हराने का दम नहीं है। आईटीआई मतदान केंद्र पर वोट डालने आए कारचोबी का काम करने वाले बुधौलिया के सगीर अहमद और अशरफ अली ने कहा कि गठबंधन सबसे अच्छा है। अखिलेश ने यूपी का बहुत विकास किया। भाजपा ने कुछ नहीं किया। छात्र साजिद रजा बोले- बेरोजगारी अखिलेश यादव ही दूर कर सकते हैं। अली जमाल जैदी, मोहम्मद हसनैन और अजहर बेग ने संकेतों में कहा कि कांग्रेस की तरफ मुस्लिम मतदाता इसलिए नहीं गए क्योंकि उस पार्टी के साथ दूसरी बिरादरियों के वोट नहीं थे।

भोजीपुरा और मीरगंज में खूब तेज दौड़ी साइकिल मगर
बरेली। धौराटांडा में करीब 20 फीसदी मुस्लिम भाजपा को भी मिलने की बात कही गई। कुछ मुसलमानों ने नाम न छापने की गुजारिश के साथ बताया कि यहां के इन मुसलमानों का भाजपा प्रत्याशी से व्यक्तिगत जुड़ाव है, लेकिन भोजीपुरा और मीरगंज के मुस्लिम बहुल इलाकों में मुसलमानों का साफ रुझान गठबंधन के पक्ष में देखने को मिला। कुछ मतदाताओं ने खुलकर तो कुछ ने इशारों में मन की बात कही। भोजीपुरा के सेक्रेड हार्ट्स स्कूल में बने मतदान केंद्र पर वोटिंग करने आए नगरिया भूड़ा नगरिया के उमर अली, प्यारे खां, शाहनाज, लईकन का कहना था कि उनके इलाके में गठबंधन प्रत्याशी की तरफ ही सबका झुकाव है। अटामंडा के करामत हुसैन का कहना था कि सारे वोट साइकिल पर गए हैं। धौराटांडा में पहली बार वोट डालने आईं परवाना, इरम और तरन्नुम ने कहा कि पूरे इलाके में साइकिल का जोर है, वह भी उसी पर वोट डालकर्र आइं हैं। धौराटांडा में निसार अहमद, इस्लाम, दानिश, अब्दुल जलील ने कहा कि गठबंधन मुस्लिमों की पहली पसंद है। शाही में पहली बार वोट डाल रहे आमिर हुसैन, मुजाहिद ने भी गठबंधन पर भरोसा दिखाया। की। शेरगढ़ में भी बारह हजार वोटरों में से 60 फीसदी मुस्लिम हैं, यहां भी उनमें गठबंधन का दबदबा रहा। दुनका, मीरगंज, फतेहगंज पश्चिमी में भी यही स्थिति सामने आई। फतेहगंज पश्चिमी में सगीर, असलम और कुछ दूसरे मतदाताओं ने भी उन्हीं का समर्थन किया। हालांकि यहां कुछ मुस्लिमों के एक खासा वर्ग के वोटर बंटे हैं। उनका कहना था कि 80 फीसदी वोट गठबंधन की तरफ है। 
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