तबादले पर गई बीडीए की ‘सरकार’- बड़ा बाईपास पर अवैध निर्माण ने पकड़ी रफ्तार
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बरेली। उपाध्यक्ष और सचिव का एक साथ ट्रांसफर होने से शहर में अवैध निर्माण पर बीडीए का शिकंजा ढीला पड़ गया है। अवैध निर्माण करने वालों की बल्ले-बल्ले है। एई और जेई की ओर से उन्हें पहले ही ढील मिली हुई थी, मगर अफसरों के न रहने या नए अफसरों को शहर समझने में कुछ समय लगने के चलते कुछ दिन इंजीनियरों की मनमानी ही चलेगी। हालांकि नई उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल के बुधवार को ज्वाइन करने के कयास लगाए जा रहे हैं।
दो माह पहले बीडीए ने 200 नर्सिंग होम संचालकों को बिल्डिंग के नक्शे की छाया प्रति प्राधिकरण में जमा करने के लिए नोटिस जारी किए थे, लेकिन किसी ने नोटिस का जवाब नहीं दिया। सूत्रों की मानें तो लोकसभा चुनाव नजदीक होने के चलते नर्सिंग होम संचालक और अवैध कॉलोनियां बनाने वाले बहुत पहले सत्ता पक्ष के नेताओं पर बीडीए से कार्रवाई न करने का दबाव बना चुके हैं। चुनाव से ऐन वक्त पहले उपाध्यक्ष और सचिव का एक साथ ट्रांसफर इसी दिशा में एक कड़ी माना जा रहा है। दोनों अफसरों के तबादले के तुरंत बाद बड़ा बाईपास, पीलीभीत बाईपास रोड, बीसलपुर रोड, हरूनगला, सौ फुटा रोड, बदायूं रोड, लाल फाटक से चौबारी तक, नैनीताल रोड, दिल्ली-रामपुर रोड, मिनी बाईपास, कर्मचारी नगर और शाहजहांपुर रोड पर बड़ी संख्या में अवैध निर्माण शुरू हो चुके हैं। नई उपाध्यक्ष और सचिव को अभी ज्वाइन करना है। इसके बाद जब तक दोनों अफसर शहर को समझेंगे, तब तक लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लग जाएगी। फिलहाल, अगले कुछ दिनों तक शहर और आसपास इलाकों में अवैध निर्माण में तेजी आने की आशंका है।
उपाध्यक्ष चार्ज छोड़ चुके हैं। मेरा भी ट्रांसफर हो चुका है। बुधवार को नई उपाध्यक्ष के ज्वाइन करने की उम्मीद है। मैं भी उसी समय तुरंत चार्ज छोड़कर लखनऊ चला जाऊंगा। अब नए अधिकारी ही अवैध निर्माण संबंधी मामले पर निर्णय लेंगे। सुरेंद्र प्रसाद सिंह, निवर्तमान सचिव बीडीए