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बड़े बकाएदारों की संपत्तियों की तलाश शुरू

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शाहजहांपुर। आयकर विभाग का 1.31 करोड़ से ज्यादा के बकाए के मामले में डान एंड डोना कान्वेंट स्कूल के प्रबंधक आलोक अंचल की एक एकड़ 72 डिस्मिल जमीन मंगलवार को अटैच किए जाने के साथ ही आयकर विभाग जिले में बड़े बकाएदारों की पड़ताल में जुटा हुआ है। डिफाल्टरों की संपत्तियों की तलाश भी की जा रही है, ताकि बकाया वसूली का दबाव बनाया जा सके। बकाया अदा न करने पर संपत्ति की बिक्री कर रिकवरी की जा सके। बेनामी संपत्तियां भी आयकर विभाग के निशाने पर हैं। आयकर अधिकारी वीरेंद्र सिंह बिष्ट का कहना है कि कर भुगतान में आनाकानी करने वालों पर सख्ती की जा रही है। हाई डिमांड वैल्यू वाले करदाताओं से नुकसान हो रहा है।
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जिले में कई बड़े करदाता हैं। समय-समय पर इनको आयकर विभाग के सामने अपनी आमदनी के स्रोत रखने होते हैं। आमदनी पर आयकर भी देना होता है। कई बार आयकर चोरी के मामले भी सामने आते हैं। करदाता समय से आयकर जमा नहीं करते। खासकर हाई डिमांड वैल्यू वाले करदाताओं पर विभाग की खास नजर रहती है। डिमांड समय से पूरी न होने पर विभाग को नुकसान होता है। सूत्रों की मानें तो जिले में करीब दो दर्जन बड़े डिफाल्टर हैं। इनको नोटिस भी दिए गए हैं। इसके बाद भी बकाया जमा नहीं किया गया है। ऐसे डिफाल्टरों की उन संपत्तियों की तलाश की जा रही है जिसे अटैच कर टैक्स की वसूली की जा सके। चीफ इनकम टैक्स कमिश्नर शिशिर अग्रवाल के निर्देशन में मंगलवार को आलोक अंचल की एक एकड़ 72 डिस्मिल जमीन को अटैच किया गया। विभागीय सूत्रों ने बताया कि डिफाल्टरों की सूची में कई बड़े नाम भी शामिल हैं। जिस तरह से आलोक अंचल मामले में जमीन अटैच करने से पहले पूरी कार्रवाई को गोपनीय रखा गया। बेनामी संपत्तियों की भी आयकर विभाग की टीमें गोपनीय तरीके से पड़ताल में जुटी हुई हैं।

जमीन की कीमत डेढ़ करोड़ के आसपास: सब रजिस्ट्रार
शाहजहांपुर। आयकर विभाग के डिफाल्टर डान एंड डोना स्कूल के प्रबंधक आलोक अंचल की आयकर विभाग द्वारा अटैच जमीन की कीमत बाजारी कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये के आसपास है। सब रजिस्ट्रार सदर राम सहाय के मुताबिक जमीन की कीमतें इलाके के हिसाब से निर्धारित होती हैं। आलोक अंचल की एक एकड़ 72 डिस्मिल जमीन लखीमपुर खीरी स्टेट हाईवे किनारे है। इस वजह से इसकी कीमत ज्यादा है। जमीन की कीमत संबंधी कोई रिपोर्ट अगर मांगी जाती है तो इस संबंध में रिपोर्ट दी जाएगी। उन्होंने बताया कि आलोक अंचल के भूखंड की कीमत डेढ़ करोड़ के आसपास हो सकती है।
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इस तरह होती है कार्रवाई
आयकर एक्ट की धाराओं के तहत विभाग आयकर दाता को नोटिस ऑफ डिमांड जारी करता है। अगर करदाता पर टैक्स देनदारी बाकी है तो उसे 20 दिन के भीतर इसका भुगतान करना होता है। जो करदाता 20 दिन में देनदारी जमा नहीं करता और स्टे लेने के साथ हाई अथॉरिटी में अपील भी नहीं करता है तो विभाग उसे डिफाल्टर मान लेता है। नोटिस दिए जाने के 30 दिन बीत जाने पर कुल बकाया पर ब्याज शुरू कर दिया जाता है। साथ ही उस पर पेनाल्टी भी लगाई जाती है। आलोक अंचल के मामले में भी ऐसा ही हुआ। डिमांड जमा न होने पर आयकर विभाग को वसूली के लिए उनकी जमीन अटैच करनी पड़ी। इसी तरह के कई और बकाएदारों पर भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। हाई डिमांड वैल्यू वाले डिफाल्टरों से सरकार को काफी नुकसान होता है। ऐसे में बड़ी कार्रवाईयों का रास्ता अख्तियार किया जा रहा है।
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- वीएस बिष्ठ, आयकर अधिकारी
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